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सर्वकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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पृष्ठ 41

३५ बालकाण्ड

सुनत सुआसिनि लै चलीं गावत बड़भागीं।
उमा-रमा, सारद-सची लखि सुनि अनुरागीं ॥ १२ ॥
निज-निज रुचि बेष बिरचिकै हिलि-मिलि सँग लागीं।
तेहि अवसर तिहु लोककी सुबसा जनु जागीं ॥ १३ ॥
चारु चौक बैठत भई भूप-भामिनि सोहैं।
गोद मोद-मूरति लिए, सुकृती जन जोहैं ॥ १४ ॥
सुख-सुखमा, कौतुक कला देखि-सुनि मुनि मोहैं।
सो समाज कहैं बरनिकै, ऐसे कबि को हैं? ॥ १५ ॥
लगे पढ़न रच्छा-ऋचा ऋषिराज बिराजे।
गगन सुमन-झरि, जय-जय, बहु बाजन बाजे ॥ १६ ॥
भये अमंगल लंकमें, संक-संकट गाजे।
भुवन चारिदसके बड़े दुख-दारिद भाजे ॥ १७ ॥
बाल बिलोकि अथरबणी हँसि हरहि जनायो।
सुभको सुभ, मोद मोदको, 'राम' नाम सुनायो ॥ १८ ॥
आलबाल कल कौसिला, दल बरन सोहायो।
कंद सकल आनंदको जनु अंकुर आयो ॥ १९ ॥
जोहि, जानि, जपि, जोरिकै करपुट सिर राखे।
'जय जय जय करुनानिधे !' सादर सुर भाषे ॥ २० ॥
'सत्यसंध ! साँचे सदा जे आखर आषे।
प्रनतपाल ! पाये सही, जे फल अभिलाषे' ॥ २१ ॥
भूमिदेव देव देखिकै नरदेव सुखारी।
बोलि सचिव सेवक सखा पटधारि भंडारी ॥ २२ ॥
देहु जाहि जोइ चाहिए सनमानि सँभारी।
लगे देन हिय हरषिकै हेरि-हेरि हँकारी ॥ २३ ॥