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सर्वकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 378, कुल 454 में से

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पृष्ठ 378

गीतावली ३७२
[जब अवधिके दिन प्रायः बीत चुके तो माता कौसल्याको
रामके मिलनेकी बड़ी ही लालसा हुई। उस समय वे कहती हैं—]
‘क्यों जी, अवधि आज ही पूरी होगी या उसका कोई और दिन
आवेगा ?’ फिर अपने महलपर चढ़कर दक्षिणकी ओर देखती हुई
कहती हैं, ‘देखो पूछो तो, वे पथिक कहाँसे आ रहे हैं ?’ ॥ १ ॥
फिर अवधिमें विलम्ब जान, हृदयमें हार मानकर शोकग्रस्त हो जाती
हैं, उनका शरीर पुलकित हो जाता है, नेत्रोंसे जल बहने लगता
है [और वे मन-ही-मन कहने लगती हैं—] मालूम होता है, हमने
जो कुटिल कर्म किये हैं, उनके परिणाममें विधाता इन चौदह वर्षोंको
अपने ही दिनोंके हिसाबसे पूरा करेगा ॥ २ ॥ ‘हाय ! राम वनमें
हैं और उनकी माता घरमें रहकर जी रही हैं !’ अब ये निर्लज्ज
प्राण इस लोकापवादको सुन-सुनकर सुखकी नींद सोवेंगे ! भला,
मुझ-जैसी कठोरचित्त वज्रकी गढ़ी हुई मूर्ति कौन होगी ! ॥ ३ ॥
[ १८ ]
आली, अब राम लषन कित ह्वैं हैं।
चित्रकूट तज्यौ तबतें न लही सुधि, बधू-समेत कुसल सुत द्वैं हैं १
बारि बयारि, बिषम हिम-आतप सहि बिनु बसन भूमितल स्वैहैं।
कंद-मूल, फल-फूल असन बन, भोजन समय मिलत कैसे वैहैं। २ ।
जिन्हहि बिलोकि सौंचिहैं लता-द्रुम-खग-मृग-मुनि लोचन जल च्वैहैं
तुलसीदास तिन्हकी, जननि हौं, मो-सी निठुर-चित औरो कहुँ ह्वैहैं ३
‘अरी सखि ! इस समय राम और लक्ष्मण किधर होंगे ? जबसे
उन्होंने चित्रकूटको छोड़ा है तबसे उनका कोई समाचार नहीं मिला।
क्या वधू सीताके सहित मेरे दोनों बालक सकुशल होंगे ? ॥ १ ॥