गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)
Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary
गोस्वामी तुलसीदास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६३ बालकाण्ड
कहो कुछ समाचार मिला क्या ?' ॥ २ ॥ [ भरतजीने कहा— ]
'माता ! तिरहुतराज जनकजाने अपने पुरोहित शतानन्दजीको
भेजा है; वे राम-लक्ष्मणके कुशल-क्षेमकी सुन्दर पत्रिका लाये
हैं ॥ ३ ॥ उन्होंने ताड़काका दमन और राक्षसोंका संहार कर
विश्वामित्रजीके यज्ञकी रक्षा की और फिर मुनिपत्नी (अहल्या)
का उद्धार किया। तदनन्तर विश्वामित्रजी उन्हें विद्या पढ़ाकर
जनकपुर ले गये; वहाँ वे गुरुजीके साथ आनन्दपूर्वक हैं ॥ ४ ॥
जनकजीने पिनाक ( चढ़ाने ) का प्रण करके, अपनी पुत्रीके
स्वयंवरका साज सजाकर बहुत-से राजाओंको एकत्र किया था। उस
राजसभामें रघुनाथजीने वह धनुष कमलनालके समान तोड़
डाला' ॥ ५ ॥ ऐसा कहकर दोनों भाई स्नेहसे शिथिल हो गये।
तब माताने उन्हें गोदमें उठा लिया और बारम्बार मुख चूमकर
मनोहर मणि और वस्त्रादि निछावर किये ॥ ६ ॥ तुलसीदासजी
कहते हैं, इस सुहावनी मनोकामनाका समाचार सुनते ही अयोध्यामें
घर-घर आनन्दमयी बधाई बजने लगी और रनिवासमें भी सखियोंने
आनन्दवश मङ्गलगान आरम्भ कर दिया ॥ ७ ॥
राग कान्हरा
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राम-लषन सुधि आई, बाजै अवध बाधई ।
ललित लगन लिखि पत्रिका,
उपरोहितके कर जनक-जनेस पठाई ॥ १ ॥
कन्या भूप बिदेहकी रूपकी अधिकाई,
तासु स्वयंबर सुनि सब आई
देस देसके नृप चतुरंग बनाई ॥ २ ॥