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सर्वकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 131, कुल 454 में से

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पृष्ठ 131

१२५ बालकाण्ड
समान और कुछ कुमुद एवं चकोरवत् जान पड़ते हैं, मैले हो रहे
हैं ॥ ५ ॥ भगवान् राम जब भाईसे बातें करते हैं तो विश्वामित्रजीसे
सकुचाकर और मेघके समान गम्भीर शब्द बोलते हैं तथा अधिक
नहीं बोलते । प्रभु सभीके सम्मुख [अनुकूल] हैं, सभीको अच्छी
दृष्टिसे देखते हैं तथा तुलसीदासकी ओर भी कृपापूर्वक हँसकर देख
रहे हैं ॥ ६ ॥
[ ७४ ]
एई राम-लषन जे मुनि-सँग आये हैं ।
चौतनी-चोलना काछे, सखि ! सोहैं आगे-पाछे,
आछे हुँते आछे, आछे आछे भाय भाये हैं ॥ १ ॥
सांवरे गोरे सरीर, महाबाहु, महाबीर,
कटि तून तीर धरे, धनुष सुहाये हैं ।
देखत कोमल, कल अतुल बिपुल बल,
कौसिक कोदंड-कला कलित सिखाये हैं ॥ २ ॥
इन्हहीं ताड़का मारी, गौतमकी तिय तारी,
भारी भारी भूरि भट रन बिचलाये हैं ।
ऋषि-मख रखवारे, दसरथके दुलारे
रंग-भूमि पगु धारे, जनक बुलाये हैं ॥ ३ ॥
इन्हके बिमल गुन गनत पुलकि तनु
सतानंद-कौसिक नरेसहि सुनाये हैं।
प्रभुपद मन दिये, सो समाज चित्त किये
हुलसि हुलसि हिये तुलसिहुँ गाये हैं ॥ ४ ॥
[पुर-नारियाँ कहती हैं—] 'जो विश्वामित्र मुनिके साथ आये
हैं वे राम लक्ष्मण ये ही हैं। सखि ! देखो, ये चौतनी टोपी और