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सर्वकोश
गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

गीतावली (गोस्वामी तुलसीदास - गीताप्रेस सम्पूर्ण ७ काण्ड सान्वय सटीक)

Gitavali of Goswami Tulsidas with Gita Press Commentary

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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पृष्ठ 126

गीतावली १२०
है जो [सीतामिलनरूप] बड़ा लाभ, बड़ा यश और बड़ी बड़ाई पाकर
सुशोभित हो सके ? ॥ ८ ॥ अब अन्य राजालोग धनुषके ऊपर अपना
गर्व गँवाकर तथा अपने बलको लज्जित कर घर लौट जायँगे और
तुलसीदासके प्रभु गाजे-बाजे के साथ अपना विवाह कर प्रस्थान
करेंगे ॥ ९ ॥
पुष्पवाटिकामें
राग तोड़ी
[ ७१ ]
भोर फूल बीनबेको गये फुलवाईं हैं ।
सीसनि टिपारे, उपबीत, पीत पट कटि,
दोना बाम करनि सलोने मे सवाई हैं ॥ १ ॥
रूपके अगार, भूपके कुमार, सुकुमार,
गुरके प्रानअधार संग सेवकाई हैं ।
नीच ज्यों टहल करें, राखें रुख अनुसरें,
कौसिक-से कोही बस किये दुहुँ भाई हैं ॥ २ ॥
सखिन सहित तेहि औसर बिधिके संजोग
गिरिजाजू पूजिबेको जानकीजू आई हैं ।
निरखि लषन-राम जाने ऋतुपति-काम,
मोहि मानो मदन मोहनी मूड नाई हैं ॥ ३ ॥
राघौजू-श्रीजानकी-लोचन मिलिबेको मोद
कहिबेको जोगु न, मैं बातें-सी बनाई हैं ।
स्वामी, सीय, सखिन्ह, लखन तुलसीको तैसो
तैसो मन भयो जाकी जैसिये सगाई हैं ॥ ४ ॥
प्रातःकाल होते ही राम और लक्ष्मण फूल बीननेके लिये
फुलवाड़ीमें पधारे हैं। उनके सिरोंपर चौतनी टोपी, [गलेमें] यज्ञोप-