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घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

घाट रामायण (सन्त तुलसी साहब हाथरस - आध्यात्मिक एवं रहस्यवादी राम-तत्त्व काव्य)

Ghat Ramayan of Sant Tulsi Sahib Hathras

सन्त तुलसी साहब (हाथरस) द्वारा

DevanagariHindipublished150 पृष्ठ

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पृष्ठ 4

तुलसी साहब तथा घट रामायण
हाथरस के तुलसी साहब निर्गुण संत मत के एक सिद्ध साधक तथा हिन्दी साहित्य के बहुचर्चित
व्यक्ति के रूप में प्रसिद्ध हैं। इनकी चर्चा प्रायः सभी इतिहास ग्रन्थों में हुई है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल,
डॉ० राम कुमार वर्मा, डॉ० गणपतिचन्द्र गुप्त आदि ने अपने इतिहास ग्रन्थों में इनके वैदुष्य तथा
स्पष्टवादिता की अनेकशः चर्चा की है फिर भी इन इतिहास ग्रन्थों को देखने से स्पष्ट रूप से ज्ञात होता
है—इसके कृतित्व एवं गम्भीर साधना का वैसा सम्यक् विश्लेषण नहीं हुआ है, जो अपेक्षित था—शायद
यह इसलिए कि ये सन्त साहित्य के समापन काल के कवि तथा चिन्तक रहे हैं और हमारी दृष्टि
कबीरदास, नानक देव, दादूदास आदि प्रारम्भिक आचार्यों तक ही सीमित रही है। हिन्दी आलोचकों एवं
सन्त साहित्य के विवेचकों में डॉ० माता प्रसाद गुप्त एवं श्री परशुराम चतुर्वेदी आदि ने इनकी चर्चा
बराबर की है।¹
जन्म तथा मृत्यु तिथि
डॉ० रामकुमार वर्मा ने सं० १८४५ को इनकी जन्मतिथि मानी है, लेकिन कोई आधार नहीं दिया
है। डॉ० माता प्रसाद गुप्त ने इनका जन्म सं० १८२० तथा मृत्यु तिथि सं० १९०० स्वीकार की है। डॉ०
रामकुमार वर्मा ने पुनः पंथ सूची में बीसवें स्थान पर शाखा पंथ की चर्चा की है, जिसका संस्थापन
समय भी संवत् १८४५ बताया है, अतः उनकी जन्म तथा मृत्यु दोनों तिथियाँ एक नहीं हो सकतीं। इस
दृष्टि से डॉ० रामकुमार वर्मा द्वारा दिया गया, इनका जन्म काल सं० १८४५ प्रामाणिक नहीं हो सकता।
इस सम्बन्ध में घट रामायण प्रकाशित बेलबेडियर प्रेस की भूमिका में लिखा गया है—
"तुलसी साहब के उत्पन्न होने का संवत् 'सुरति विलास' में नहीं दिया है पर यह लिखा गया है कि
उन्होंने अनुमानतः अस्सी वर्ष की अवस्था में जेठ सुदी २, विक्रमी संवत् १८९९ या १९०० में चोला
छोड़ा। इससे उनके देह धारण करने का समय संवत् १८२० के लगभग ठहरता है।"²
इन साक्ष्यों से स्पष्ट है कि तुलसी साहब की जन्म तिथि के सम्बन्ध में डॉ० माता प्रसाद गुप्त का ही
मत अधिक प्रामाणिक है। इस प्रकार, उनका जन्म संवत् १८०० एवं मृत्यु संवत् १९०० में हुई थी।
जीवन परिचय
बेलबिडियर प्रेस से प्रकाशित उनके घट रामायण की भूमिका में उनका प्रामाणिक जीवन परिचय
दिया हुआ है। उनका यह जीवन परिचय "तुलसी साहब का जीवन चरित्र" के शीर्षक से दिया गया है।
इसके अतिरिक्त हिन्दी साहित्य में इतिहास ग्रन्थों में केवल डॉ० रामकुमार वर्मा ने हिन्दी साहित्य के
आलोचनात्मक इतिहास में एक सूचनात्मक तथा अधूरा परिचय दिया है, जिससे इनके जीवनवृत्त के
सम्बन्ध में स्पष्ट अवधारणा नहीं बनती। बेलबेडियर प्रेस से प्रकाशित घट रामायण की भूमिका के
अनुसार इनका जीवन परिचय इस प्रकार हैं—
"सतगुरु तुलसी साहब जिनको लोग साहिब जी भी कहते थे, जाति के दक्षिणी ब्राह्मण राजा पूना
के युवराज यानी बड़े बेटे थे, जिनका नाम उनके पिता ने श्याम राव रखा था। बारह वर्ष की उनकी
१. हिन्दी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास डॉ० रामकुमार वर्मा, पृ० २७८ (राजकमल संस्करण)
२. तुलसीदास : डॉ० माता प्रसाद गुप्त, पृ० 74 (घट रामायण : भाग 1. भूमिका, जीवन चरित्र).