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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

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( २ )

(१) एक साल सूखा पड़ा। सेवकों ने प्रार्थना की तो आप ने दया से ऐसी मौज
की कि खूब मेंह बरसा। यह चर्चा दिल्ली में वादशाह के कान तक पहुँची। बादशाह पर
उसी समय में एक दुशमन ने चढ़ाई की थी इस लिये बादशाह ने बड़े आदर और
सत्कार से बहुत से हाथी और सवार भेजकर गरीबदास जी को बुलाया। इन्होंने
जलूस को तो लौटा दिया और आप सादी चाल से एक घोड़ी पर चढ़ कर पाँच सेवकों
के साथ दिल्ली पहुँचे। और महात्मा चरनदास जी के स्थान पर ठहर कर वहाँ से पैदल
बादशाह के यहाँ गये। बादशाह ने दीनता से दुशमन से बचाने के लिये बिनती की।
महात्मा जी बोले कि अगर तुम तीन बातें छोड़ दो तो दुशमन तुम्हारा बाल बाँका न कर
सकेगा—एक तो गोबध, दूसरे अनाज पर कर, तीसरे बहुत सी बेगमों का रखना। इस
पर बादशाह के दरबारियों ने बादशाह को भड़काया कि यह फकीर हिन्दू है और अपने
मत के जाल में हुजूर को भी फँसाया चाहता है। बादशाह ने उन नादानों की सलाह में
आकर गरीबदास जी को मय उन के सेवकों के कैदखाने में तीन तालों में बन्द कर
दिया। पहरेवाले ने ताने से कहा कि देखें तो अगर सच्चे फकीर हो तो बन्दीखाने से
निकल जाव। कुछ देर बाद महात्माजी ने ऐसी मौज की कि तीनों दरवाजे और ताले
खुल गये और वह अपने सेवकों के साथ निकल कर अपने स्थान को वापस
आये। अगले दिन जब बादशाह को खबर हुई तो वह लज्जित हुआ और फिर दोबारा
उनको बुलाया पर वह नहीं आये। फिर बादशाह ने पाँच गाँव की जागीर देनी चाही
उसके लेने से भी उन्होंने इनकार किया।
(२) मौजा आसोध जिला रोहतक के एक साहूकार का इकलौता बेटा संतोषदास
गरीबदासजी की महिमा सुन कर उनका चेला हुआ और कुछ दिन बाद उस की प्रार्थना
पर उन्हों ने उसे साधू बना लिया। यह सुन कर उस के बाप को बड़ा क्रोध आया और
गरीबदासजी के स्थान पर जाकर बहुत भला बुरा कह कर बोला की तू ने मेरे बेटे को
तो साधू बना लिया है अब उसकी घरवाली तेरी बहिन का क्या हाल होगा। महात्मा जी
ने उसके कटु बचन के जवाब में बहुत कोमलता से कहा कि अगर तुम अपनी पतोहू को
मेरी बहिन बनाते हो तो वह मेरी बहिन ही हो कर रहेगी। महात्मा जी के मुख से यह
बचन निकलते ही उस औरत को मौजा आसोध में बैराग आया और अपनी चूड़ी
वगैरह फोड़ कर साधुनी बन गई और गरीबदास जी की सेवा में रहने लगी।
और कथायें बहुत सी मशहूर हैं मगर मामूली सिद्धि शक्ति की हैं जो गरीबदास
जी सरीखे साध गुरु की अपरम्पार महिमा को नहीं लखातीं।
गरीबदास जी के पहिनने का जामा और बँधी हुई पगड़ी और धोती जूता और
लोटा और कटोरी और पलंग अब तक मौजा छुड़ानी में उनकी समाध के स्थान पर
मौजूद हैं जहाँ लोग दर्शन को जाते हैं।