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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

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जीवन-चरित्र
———
महात्मा गरीबदास जी मौजा छुड़ानी तहसील झज्जर जिला रोहतक (पञ्जाब)
में बैसाख सुदी पूनो सम्बत १७७४ बिक्रमी मुताबिक ईसवी सन् १७१७ को प्रगट हुए।
वह जाति के जाट धनखड़े या दलाल गोत्र के थे और पेशा जमींदारी का करते थे।
अपने घर मौजा छुड़ानी ही में सतसंग खड़ा करके जीवों को चेताते रहे और सारी
उमर गृहस्थ में रह कर ६१ बरस की उमर में भादों सुदी २ विक्रमी संबत १८३५ मुताबिक
ईसवी सन् १७७८ को चोला छोड़ा। इस हिसाब से जान पड़ता है कि गरीबदास जी
और महात्मा चरनदास जी एक ही समय में बिराजमान थे—चरनदास जी के जन्म से
चौदह बरस पीछे यह प्रगट हुए और उनके चोला छोड़ने से चार बरस पहिले गुप्त हुए।
गरीबदास जी के दो लड़की और चार लड़के थे। बाजे कहते हैं कि उनके बेटों
ही में से एक गद्दी पर बैठा और बाजों का कथन है कि उनके गुरमुख चेले सलोतजी ने
गद्दी पाई। जो हो पर इस वक्त तो यही रिवाज है कि औलाद ही को महन्ती मिलती
है और वह गृहस्थ ही में रहा करते हैं।
गरीबदास जी पूरी साध गति के थे और उन्हों ने कबीर साहब को अपना गुरु
धारन किया। कबीर साहब अनुमान तीन सौ बरस इनके पहिले हुए थे लेकिन गरीबदास
जी से उन का मेला होने की बाबत कितनों का तो विश्वास है कि सुपने में दर्शन हुए और
उपदेश मिला और कुछ लोग कहते हैं कि बारह बरस की उमर में गरीबदास जी मौजा
छुड़ानी में पौहे चरा रहे थे कि कबीर साहब प्रगट हुए और एक छोटी भैंस को जो कभी
गाभिन नहीं हुई थी दिखला कर कहा कि इस का दूध हम को पिलाओ। गरीबदास जी
ने जवाब दिया कि यह दूध नहीं देती जिस पर कबीर साहब बोले कि देखो तो सही
जरूर देगी। गरीबदास जी ने ज्योंही हाथ लगाया उस छोटी भैंस के थन से दूध टपकने
लगा। यह चमत्कार देख कर गरीबदास जी को कबीर साहब के समरथ होने का
विश्वास हुआ और उन के चरनों पर गिर कर उपदेश लिया। पहली कथा जियादा
समझ में आती है।
बाईस बरस की उमर में गरीबदास जी ने एक ग्रन्थ रचना शुरू किया जिस में
सत्तरह हजार चौपाई और साखी उनकी हैं और उसी के साथ कबीर साहब की सात
हजार साखियाँ शामिल की हैं उन्हीं सत्तरह हजार कड़ियों में से इस पुस्तक के अंग और
कड़ियां चुन कर छापी गई हैं।
गरीबदास जी के पन्थ के बहुत से लोग हैं और अब तक उनका बंस भी मौजूद
है। मौजा छुड़ानी में फागुन सुदी दसमी को एक बड़ा मेला गरीबदासियों का उन
महात्मा जी का जारी किया हुआ अब तक होता है।
गरीबदास जी की बाबत बहुत से चमत्कार मशहूर हैं लेकिन वह सब लिखने के
लायक नहीं हैं, सिर्फ दो एक चुनकर लिखे जाते हैं—