गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)
Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
पृष्ठ 173, कुल 186 में से
संदर्भ में पढ़ेंराग बिलावल १६३
सील हमारा सेल१ है, औ छिमा कटारी ।
तत्त तीर तक मार हूँ, कहँ जात अनारी ॥ ३ ॥
बुधि हमरी बन्दूक है, दिल अंदर दारू२ ।
प्रेम पियाला सार का, चित चकमक झारू३ ॥ ४ ॥
तत्त हमारी तेग४ है, जो असल असीलं ।
सूरे सनमुख लेत हैं, कायर मुख पीलं ॥ ५ ॥
घायल घूमै अरस में, जिस लगी करारी ।
औषध निःचा नाम है, जिन्ह पीड़५ पुकारी ॥ ६ ॥
पाखरिया६ सतलोक के, रन-जीत पठाये ।
कहता दास गरीब है, गुरुगम से आये ॥ ७ ॥
( ११ )
घट ही अंदर गारडू७, धोखे मर गइया ।
सार सब्द चीन्हा नहीं, कुछ भेद न लहिया ॥ टेक ॥
न्योल जड़ी कूँ सूँघ कर, गृह डंक लगावै ।
सरपिन बाँबिहि सूँ डसी, कहिं जान न पावै ॥ १ ॥
बाजी अनहद बीन रे, फूँ भई फुँकारा ।
भगल बिद्या बाजीगरी, जानै गुरु म्हारा ॥ २ ॥
सतगुरु मिलिया गारडू, जिन्ह मंतर दीन्हा ।
नागदमन८ तिरगुन जड़ी, बिषयर६ बस कीन्हा ॥ ३ ॥
बाजीगर की डुगडुगी, बिषयर भरमाया ।
घाल पिटारे ले चला, घरबार नचाया ॥ ४ ॥
ऐसा सतगुरु कीजिये, बाजीगर पूरा ।
दास गरीब अमर करै, दिल दरस जहूरा ॥ ५ ॥
(१) भाला । (२) बारूद । (३) एक लोहे की चीज जिसको पत्थरों पर मार कर
आग निकालते हैं । (४) तलवार । (५) दरद । (६) लोहे की जाली जो लड़ाई में घोड़े
की हिफाजत के लिए उस पर डालते हैं । (७) साँप का मंत्र जानने वाला । (८) साँप की
जड़ी । (६) साँप ।