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सर्वकोश
गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

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पृष्ठ 81

-२. ९०] परिकर्मव्यवहारः [ २७
अत्रोद्देशकः
पञ्चाष्टगच्छपुंसोर्व्यस्तप्रभवोत्तरे समानधनम् ।
द्वित्रिगुणादिधनं वा ब्रूहि त्वं गणक विगणय्य ॥८७॥
द्वादशषोडशपदयोर्व्यस्तप्रभवोत्तरे समानधनम् ।
व्यादिगुणभागधनमपि कथय त्वं गणितशास्त्रज्ञ ॥८८॥
असमानोत्तरसमगच्छसमधनस्याद्युत्तरानयनसूत्रम्—
अधिकचयस्यैकादिश्चाधिकचयशेषचयविशेषो गुणितः ।
विगतैकपदार्धेन सरूपश्च मुखानि मित्र शेषचयानाम् ॥८९॥
अत्रोद्देशकः
एकादिषडन्तचयानामेकत्रितयपञ्चसप्तचयानाम् ।
नवनवगच्छानां समवित्तानां चाशु वद मुखानि सखे ॥९०॥
१ M गणकमुखतिलक ।
उदाहरणार्थ प्रश्न
दो मनुष्यों के धन क्रमशः दो समान्तर श्रेणियों के योग से ज्ञात होते हैं । श्रेणियों-सम्बन्धी
पदों की संख्या ५ और ८ है । दोनों श्रेणियों के प्रथम पद और प्रचय परस्पर बदलने योग्य हैं । श्रेणियों
के योग बराबर हैं अथवा उनमें से एक का योग दूसरे का दुगुना, तिगुना, आधा अथवा ऐसा ही कोई
अपवर्त्य है । हे गणितवेत्ता, शुद्ध गणना के पश्चात् बतलाओ कि इन योगों के तथा परस्पर बदलने योग्य
प्रथमपद और प्रचय के मान क्या हैं ? ॥८७॥ दो समान्तर श्रेणियों के सम्बन्ध में, जिनके पदों की
संख्या १२ और १६ है, प्रथमपद और प्रचय परस्पर बदलने योग्य हैं । श्रेणियों के योग बराबर हैं
अथवा उनमें से एक का योग दुगुना अथवा कोई ऐसा ही अपवर्त्य अथवा भाग है । हे गणितशास्त्रज्ञ
बतलाओ कि इन योगों के तथा परस्पर बदलने योग्य प्रथमपद और प्रचय के मान क्या होंगे ? ॥८८॥
असमान प्रचयौं, समगच्छ और समयोग धनवाली समान्तर श्रेणियों के प्रथम पद प्राप्त करने
का नियम—
जिसका प्रचय सबसे बड़ा है ऐसी श्रेढि का प्रथमपद एक ले लिया जाता है । इस सबसे बड़े प्रचय
और शेष प्रचय के अन्तर को एक से ह्रासित गच्छ की आधी राशि द्वारा गुणित करते हैं । जब इस गुणन-
फल में एक मिलाते हैं तो हे मित्र हमें शेष प्रचय वाली श्रेणियों के प्रथमपद प्राप्त होते हैं ॥८९॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
हे सखे ! बराबर योग वाली दो श्रेणियों के प्रथमपदों को बतलाओ जब कि उनमें से प्रत्येक
में ९ गच्छ है तथा प्रचय क्रमशः १ से आरम्भ होकर ६ तक एक दशा में और १, ३, ५ और ७
दूसरी दशा में हो ॥९०॥
(८९) यहाँ दिया गया हल साधारण नियम की विशेष दशा है । अ₁ = (न - १)/२ ( ब₁ - ब) + अ,
जहाँ अ और अ₁ दो श्रेणियों प्रथमपद हैं; ब और ब₁ उनके संवादी प्रचय हैं । इस सूत्र ( formula )
में, जहाँ ब, ब₁ और न दिये गये हैं; अ₁ का मान अ के किसी मान को चुन लेने पर निकाला जा
सकता है । इस नियम में अ का मान १ लिया गया है ।