गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
पृष्ठ 308, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ें२५४ ] गणितसारसंग्रहः [ ८. १२½-
अत्रोद्देशकः
समचतुरश्रा वापी विंशतिरुपरीह षोडशैव तले ।
वेधो नव किं गणितं गणितविदाचक्ष्व मे शीघ्रम् ॥ १२½ ॥
वापी समत्रिबाहुर्विंशतिरुपरीह षोडशैव तले ।
वेधो नव किं गणितं कर्मान्तिकमौण्ड्रमपि च सूक्ष्मफलम् ॥ १३½ ॥
समवृत्तासौ वापी विंशतिरुपरीह षोडशैव तले ।
वेधो द्वादश दण्डाः किं स्यात्कर्मान्तिकौण्ड्रसूक्ष्मफलम् ॥ १४½ ॥
आयतचतुरश्रस्यत्वायामःषष्टिरेव विस्तारः। द्वादश मुखे तलेऽर्धं वेधोऽष्टौ किं फलं भवति ॥१५½॥
नवतिरशीतिः सप्ततिरायामश्चोर्ध्वमध्यमूलेषु ।
विस्तारो द्वात्रिंशत् षोडश दश सप्त वेधोऽयम् ॥ १६½ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
एक ऐसा कूप है जिसका छेदीय ( sectional ) क्षेत्र समभुज चतुर्भुज है । ऊपरी ( मुख )
छेदीय क्षेत्र की भुजाओं में से प्रत्येक का मान २० हस्त है और नितल ( bottom ) छेदीय क्षेत्र की
प्रत्येक भुजा १६ हस्त की है। गहराई ( वेध ) ९ हस्त है। हे गणितज्ञ, घनफल का माप शीघ्र
बतलाओ ॥ १२½ ॥
समभुज त्रिभुजीय अनुप्रस्थ छेदवाले कूप के ऊपरी छेदीय क्षेत्र की भुजाओं में से प्रत्येक
२० हस्त की और नितल छेदीय क्षेत्र की भुजाओं में से प्रत्येक १६ हस्त की है; गहराई ९ हस्त है।
कर्मान्तिक घनफल, औण्ड्र घनफल और सूक्ष्म रूप से ठीक घनफल क्या-क्या हैं ? ॥ १३½ ॥
समवृत्त आकार के छेदीय क्षेत्रवाले कूप के ऊपरी छेदीय क्षेत्र का व्यास २० दंड और निम्न
छेदीय क्षेत्र का व्यास १६ दंड है। गहराई १२ दंड है। कर्मांतिक, औण्ड्र और सूक्ष्म घनफल क्या
हो सकते हैं ? ॥ १४½ ॥
आयताकार छेदीय क्षेत्र वाले खात के ऊपरी छेदीय क्षेत्र की लंबाई ६० हस्त और चौड़ाई
१२ हस्त है, तथा निम्न छेदीय क्षेत्र की लम्बाई ऊपर के छदीय क्षेत्र की आधी है, और चौड़ाई भी आधी
है । गहराई ९ हस्त है। यहाँ घनफल क्या है ? ॥ १५½ ॥
इसी प्रकार के एक और दूसरे कूप के ऊपरी छेदीय क्षेत्र, बीच के छेदीय क्षेत्र और निम्न छेदीय
क्षेत्र की लम्बाईयाँ क्रमशः ९०, ८० और ७० हस्त हैं, तथा चौड़ाइयाँ क्रमशः ३२,१६ और १० हस्त
हैं। यह गहराई में ७ हस्त है। इष्ट घनफल का माप दो ? ॥ १६½ ॥
'ऊ' विपाटित स्तूप की ऊँचाई है । घनाकार समाई के सूक्ष्म माप के लिये दिये गये
इस सूत्र का सत्यापन कर्मांतिक और औण्ड्र फलों के निम्नलिखित मानों की सहायता
से किया जाता है ।
का = ( (अ' + ब') / २ )² × ऊ, आ = ( (अ')² + (ब')² ) / २ × ऊ
इसी प्रकार, सम त्रिभुजाकार एवं आयताकार आधारवाले तिर्यक् छिन्न ( truncated ) स्तूप
तथा सम वृत्ताकार आधार वाले तिर्यक् छिन्न शंकुओं के संबंध में भी सत्यापन किया जा सकता है ।