गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
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-८. ११½ ] खातव्यवहारः [ २५३
बाह्याभ्यन्तरसंस्थिततत्तत्क्षेत्रस्थबाहुकोटिभुवः ।
स्वप्रतिबाहुसमेता भक्तास्तत्क्षेत्रगणनयान्योन्यम् ॥ ९ ॥
गुणिताश्च वेधगुणिताः कर्मान्तिकसंज्ञगणितं स्यात् ।
तद्बाह्यान्तरसंस्थिततत्तत्क्षेत्रे फलं समानीय ॥ १० ॥
संयोज्य संख्ययाप्तं क्षेत्राणां वेधगुणितं च । औण्ड्रफलं तत्फलयोर्विशेषकस्य त्रिभागेन ॥
संयुक्तं कर्मान्तिकफलमेव हि भवति सूक्ष्मफलम् ॥ ११½ ॥
ऊपरी छेदीय ( sectional ) क्षेत्र का निरूपण करनेवाली आकृति के आधार और अन्य
भुजाओं के मानों को क्रमशः तली के छेदीय क्षेत्र का निरूपण करनेवाली आकृति के आधार और
संवादी भुजाओं के मानों में जोड़ते हैं। इस प्रकार प्राप्त कई योग प्रश्न में विचाराधीन छेदीय क्षेत्रों की
संख्या द्वारा भाजित किये जाते हैं। तब भुजाएँ ज्ञात रहने पर, क्षेत्रफल निकालने के नियमानुसार,
परिणामी