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गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 285, कुल 421 में से

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पृष्ठ 285

-७. १६८½ ] क्षेत्रगणितव्यवहारः [ २३१
अत्रोद्देशकः
गणितं सूक्ष्मं पञ्च त्रयोदश व्यावहारिकं गणितम् ।
द्विसमचतुरश्रभूमुखदोषः के षोडशेच्छया च ॥ १६६½ ॥
त्रिसमचतुरश्रस्योदाहरणम् ।
गणितं सूक्ष्मं पञ्च त्रयोदश व्यावहारिकं गणितम् ।
त्रिसमचतुरश्रबाहून् संचिन्त्य सखे ममाचक्ष्व ॥ १६७½ ॥
व्यावहारिकस्थूलफलं सूक्ष्मफलं च ज्ञात्वा तद्व्यावहारिकस्थूलफलवत् सूक्ष्मगणितफलवत्सम-
त्रिभुजानयनस्य च समवृत्तक्षेत्रव्यासानयनस्य च सूत्रम्—
धनवर्गान्तरमूलं यत्तन्मूलाद्द्विसंगुणितम् ।
बाहुस्त्रिसमत्रिभुजे समस्य वृत्तस्य विष्कम्भः ॥ १६८½ ॥
सन्निकट क्षेत्रफल का माप, मन से चुनी हुई राशि द्वारा भाजित होकर, भुजाओं के मान को
उत्पन्न करता है ।
तीन बराबर भुजाओं वाले चतुर्भुज क्षेत्र की दशा में, ऊपर बतलाये हुए दो क्षेत्रफलों के वर्गों के
अंतर के वर्गमूल को क्षेत्रफल के सन्निकट माप में जोड़ते हैं । इस परिणामी योग को कल्पित राशि
मानकर उसमें ऊपर बतलाये हुए वर्गमूल को जोड़ते हैं । पुनः, उसी कल्पित राशि में से उक्त वर्गमूल
को घटाते हैं । इस प्रकार प्राप्त राशियों में वर्गमूल का भाग अलग-अलग देकर, आधार और ऊपरी भुजा
प्राप्त करते हैं । यहाँ भी क्षेत्रफल के व्यावहारिक माप को इस कल्पित राशि के वर्गमूल द्वारा भाजित
करने पर अन्य भुजाओं के माप प्राप्त होते हैं ।
उदाहरणार्थ प्रश्न
सूक्ष्म क्षेत्रफल का माप ५ है, क्षेत्रफल का सन्निकट माप १३ है, और मन से चुनी हुई राशि
१६ है । दो बराबर भुजाओं वाले चतुर्भुज क्षेत्र के संबंध में आधार, ऊपरी भुजा और अन्य भुजा के
मान क्या-क्या हैं ? ॥ १६६½ ॥
तीन बराबर भुजाओं वाले चतुर्भुज क्षेत्र संबंधी एक उदाहरण—
क्षेत्रफल का सूक्ष्म रूप से शुद्ध माप ५ है, और क्षेत्रफल का व्यावहारिक माप १३ है । हे मित्र,
सोचकर मुझे बतलाओ कि तीन बराबर भुजाओं वाले चतुर्भुज क्षेत्र की भुजाओं के माप क्या-क्या
हैं ? ॥ १६७½ ॥
समत्रिबाहु त्रिभुज और समवृत्त के व्यास को प्राप्त करने के लिये नियम, जब कि उनके व्याव-
हारिक और सूक्ष्म क्षेत्रफल के माप ज्ञात हों—
क्षेत्रफल के सन्निकट और सूक्ष्म रूप से ठीक मापों के वर्गों के अंतर के वर्गमूल के वर्गमूल
को २ द्वारा गुणित किया जाता है । परिणाम, इष्ट समत्रिभुज की भुजा का माप होता है । वह, इष्ट
वृत्त के व्यास का माप भी होता है ॥ १६८½ ॥
(१६८½) किसी समबाहुत्रिभुज के व्यावहारिक और सूक्ष्म क्षेत्रफल के मानों के लिये इस
अध्याय की गाथा ७ और ५० के नियमों को देखिये ।