गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
पृष्ठ 256, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ें२०२ ] गणितसारसंग्रहः [ ७. ८४½-
वृत्तक्षेत्रत्रयस्यान्योऽन्यस्पर्शनाज्जातस्यान्तरस्थितक्षेत्रस्य सूक्ष्मफलानयनसूत्रम्—
विष्कम्भमानसमकत्रिभुजक्षेत्रस्य सूक्ष्मफलम् ।
वृत्तफलार्धविहीनं फलमन्तरजं त्रयाणां स्यात् ॥ ८४½ ॥
अत्रोद्देशकः
विष्कम्भचतुष्काणां वृत्तक्षेत्रत्रयाणां च । अन्योऽन्यस्पृष्टाना मन्तरजक्षेत्रगणितं किम् ॥ ८५½ ॥
षडश्रक्षेत्रस्य कर्णावलम्बकसूक्ष्मफलानयनसूत्रम्—
भुजभुजकृतिकृतिवर्गौ द्वित्रित्रिगुणा यथाक्रमेणैव ।
श्रुत्यवलम्बककृतिधनकृतयश्च षडश्रके क्षेत्रे ॥ ८६½ ॥
अत्रोद्देशकः
भुजषट्कक्षेत्रे द्वौ द्वौ दण्डौ प्रतिभुजं स्याताम् ।
अस्मिन् श्रुत्यवलम्बकसूक्ष्मफलानां च वर्गाः के ॥ ८७½ ॥
तीन समान परस्पर एक दूसरे को स्पर्श करनेवाले वृत्तीय क्षेत्रों के बीच के क्षेत्र का सूक्ष्म रूप
से शुद्ध क्षेत्रफल निकालने के लिये नियम—
जिसकी प्रत्येक भुजा व्यास के बराबर होती है ऐसे सम त्रिभुज का सूक्ष्म क्षेत्रफल इन तीन
में से किसी भी एक के क्षेत्रफल की अर्द्धराशि द्वारा हासित किया जाता है । शेष ही इष्ट क्षेत्रफल
होता है ॥८४½॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
परस्पर एक दूसरे को स्पर्श करने वाले तथा माप में ४० व्यास वाले तीन वृत्तों की परिधियों
से घिरे हुए क्षेत्र का सूक्ष्म क्षेत्रफल क्या है ? ॥८५½॥
नियमित षड्भुज क्षेत्र के संबंध में कर्ण, अवलम्ब ( लम्ब ) और क्षेत्रफल के सूक्ष्म रूप से शुद्ध
मानों को निकालने के नियम—
षट्भुज क्षेत्र के संबंध में भुजा के माप को, इस भुजा के वर्ग को तथा इसी भुजा के वर्ग के वर्ग
को क्रमशः २, ३ और ३ द्वारा गुणित करने पर उसी क्रम में कर्ण, लम्ब का वर्ग और क्षेत्रफल के माप
का वर्ग प्राप्त होता है ॥८६½॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
नियमित षट्भुजाकार आकृति के संबंध में प्रत्येक भुजा २ दण्ड है । इस आकृति के कर्ण का
वर्ग, लम्ब का वर्ग और सूक्ष्म क्षेत्रफल के माप का वर्ग बतलाओ ॥८७½॥
(८६½) यह नियम नियमित षट्भुज आकृति के लिये लिखा गया ज्ञात होता है । यह सूत्र षट्भुज के
क्षेत्रफल का मान √ ३अ⁴ देता है, जहाँ किसी भी एक भुजा की लम्बाई अ है । तथापि शुद्ध
सूत्र यह है-- अ² × (३√३)/२