गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
पृष्ठ 253, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ें-७. ७५½ ] क्षेत्रगणितव्यवहारः [ १९९
विपरीतक्रियायां सूत्रम्—
गुणचापकृतिविशेषात्तर्कहृतात्पदम्विषुः समुद्दिष्टः ।
शरवर्गात् षङ्गुणितादूनं¹ धनुषः कृतेः पदं जीवा ॥ ७४½ ॥
अत्रोद्देशकः
धनुराकारक्षेत्रे ज्या द्वादश षट् शरः काष्ठम् ।
न ज्ञायते सखे त्वं का जीवा कः शरस्तस्य ॥ ७५½ ॥
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१. B और M दोनों में उपर्युक्त पाठ है; पर इष्ट अर्थ “षङ्गुणितादूनाया धनुष्कृतेः पदं जीवा” से
निकलता है ।
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विपरीत क्रिया के सम्बन्ध में नियम—
डोरी के वर्ग और धनुष के वक्रकाष्ठ के वर्ग के अन्तर की ⅙ भाग राशि का वर्गमूल बाण का
माप होता है । धनुषकाष्ठ के वर्ग में से बाण के वर्ग की ६ गुनी राशि को घटाने से प्राप्त शेष का
वर्गमूल डोरी का माप होता है ॥ ७४½ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
धनुषाकार आकृति की डोरी १२ है, और बाण ६ है । झुकी हुई काष्ठ का माप अज्ञात है । हे
मित्र, उसे निकालो । इसी आकृति के संबंध में डोरी और उसके बाण के माप को अलग-अलग किस
तरह निकालोगे, जब कि आवश्यक राशियाँ ज्ञात हों ? ॥ ७५½ ॥
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( ७३½-७४½ ) बीजीय रूप से, चाप = √( ६ ल² + क² ); लम्ब = √( (च² - क²) / ६ )
और चापकर्ण = √( च² - ६ ल² )
चापकर्ण और बाण के पदों में चाप का मान समीकरण के रूप में देने के लिये अर्द्धवृत्त बनानेवाले
चाप को आधार मानना पड़ता है । प्राप्त सूत्र को किसी भी अवधा ( वृत्त खंड ) के चाप का मान
निकालने के उपयोग में लाते हैं । अर्द्धवृत्तीय चाप = त्र × √ १० = √ १० त्र² = √ ६ त्र² + ४ त्र²
होता है, जहाँ त्र त्रिज्या अथवा अर्द्धव्यास है । इसी सिद्धान्त पर आधारित यह सूत्र किसी भी चाप के
लिये है । यहाँ ल = बाण ( चाप तथा चापकर्ण के बीच की महत्तम दूरी ), और क = जीवा ( चापकर्ण )
है । जम्बूद्वीप प्रज्ञप्ति ( २/२४, ६/१० ) में धनुषपृष्ठ का सूत्र महावीर के सूत्र समान है,
धनुषपृष्ठ = √ { ६ ( बाण² ) + { ( व्यास - बाण ) ४ बाण } } = √ { ६ ( बाण )² + ( जीवा )² }
त्रिलोक प्रज्ञप्ति ( ४/१८१ ) में सूत्र इस रूप में है,
धनुष = √ { २ { ( व्यास + बाण )² - ( व्यास )² } }
बाण निकालने के लिये जम्बूद्वीप प्रज्ञप्ति ( ६/११ ) तथा त्रिलोक प्रज्ञप्ति ( ४/१८२ ) में अवतरित
सूत्र दृष्टव्य हैं ।