गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें-७. ६९½ ] क्षेत्रगणितव्यवहारः [ १९७
अत्रोद्देशकः
व्यासोऽष्टादश दण्डा मुखविस्तारोऽयमपि च चत्वारः ।
कः परिधिः किं गणितं सूक्ष्मं तत्कम्बुकावृत्ते ॥ ६६½ ॥
बहिश्चक्रवालवृत्तक्षेत्रस्य चान्तश्चक्रवालवृत्तक्षेत्रस्य च सूक्ष्मफलानयनसूत्रम्—
निर्गमसहितो व्यासो दशपदनिर्गमगुणो बहिर्गणितम् ।
रहितोऽधिगमनासावभ्यन्तरचक्रवालवृत्तस्य ॥ ६७½ ॥
अत्रोद्देशकः
व्यासोऽष्टादश दण्डाः पुनर्बहिर्निर्गतास्त्रयो दण्डाः ।
सूक्ष्मगणितं वद त्वं बहिरन्तश्चक्रवालवृत्तस्य ॥ ६८½ ॥
व्यासोऽष्टादश दण्डा अन्तः पुनरधिगताश्च चत्वारः ।
सूक्ष्मगणितं वद त्वं चाभ्यन्तरचक्रवालवृत्तस्य ॥ ६९½ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
शंख आकृति के वक्ररेखीय क्षेत्र के संबंध में महत्तम चौड़ाई १८ दंड है, और मुख की चौड़ाई ४
दंड है । इसकी परिमिति और सूक्ष्म क्षेत्रफल के माप क्या हैं ? ॥६६½॥
बाहर स्थित और भीतर स्थित ( बहिश्चक्रवाल और अंतश्चक्रवाल ) कंकण के संबंध में सूक्ष्म
मापों को निकालने के लिये नियम —
भीतरी व्यास में चक्रवाल वृत्त की चौड़ाई जोड़कर, प्राप्त राशि को १० के वर्गमूल तथा चक्र-
वाल वृत्त की चौड़ाई द्वारा गुणित करते हैं । इससे बहिश्चक्रवाल वृत्त का क्षेत्रफल प्राप्त होता है ।
बाहरी व्यास को चक्रवाल वृत्त की चौड़ाई द्वारा हासित करते हैं । प्राप्त राशि को १० के वर्गमूल
तथा चक्रवाल वृत्त की चौड़ाई द्वारा गुणित करने से अंतश्चक्रवाल वृत्त का क्षेत्रफल प्राप्त होता है ॥६७½॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
चक्रवाल वृत्त का भीतरी अथवा बाहरी व्यास का माप १८ दंड है । चक्रवाल वृत्त की चौड़ाई
३ दंड है । बहिश्चक्रवाल वृत्त तथा अंतश्चक्रवाल वृत्त का सूक्ष्म माप बतलाओ ॥ ६८½ ॥ बाहरी
व्यास १८ दंड है । अंतश्चक्रवाल वृत्त की चौड़ाई ४ दंड है । अंतश्चक्रवाल वृत्त का सूक्ष्म क्षेत्रफल
निकालो ॥ ६९½ ॥
क्षेत्रफल = [{(अ - ३/२ म) × ½}² + (म/४)² ] × √१० ; जहाँ अ महत्तम चौड़ाई
का माप है और म शंख के मुख की चौड़ाई है । गाथा २३ के नोट के अनुसार यहाँ भी इस आकृति
को दो असमान अर्द्धवृत्तों द्वारा संरचित किया गया है ।