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गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 212, कुल 421 में से

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पृष्ठ 212

१५८ ] गणितसारसंग्रहः [ ६. २६४½-
वणिजः षट् स्वधनाद्वित्रिभागमात्रं क्रमेण तज्ज्येष्ठः ।
स्वस्वानुजाय दत्त्वा समवित्ताः किं च हस्तगतम् ॥ २६४½ ॥
परस्परहस्तगतधनसंख्यामात्रधनं दत्त्वा समधनानयनसूत्रम्—
वाञ्छाभक्तं रूपं पदयुतमादावुपर्युपर्यैतत् ।
संस्थाप्य सैकवाञ्छागुणितं रूपोनमितरेषाम् ॥२६५½॥
अत्रोद्देशकः
वणिजस्त्रयः परस्परकरस्थधनमेकतोऽन्योन्यम् ।
दत्त्वा समवित्ताः स्युः किं स्याद्धस्तस्थितं द्रव्यम् ॥ २६६½ ॥
था, अपने से छोटों को क्रमशः २/३ रकम ( उसकी जो उनके हाथों में अलग-अलग थी ) क्रमानुसार दी ।
बाद में वे सब समान धन वाले हो गये । उन सबके पास अलग-अलग हाथ में कौन-कौन सी रकमें
थीं । ॥ २६४½ ॥
हाथ की समान रकमों को निकालने के लिये नियम, जब कि कुछ ( संख्या के ) मनुष्य एक
से दूसरे को आपस में ही उतना धन देते हैं, जितना कि क्रमशः उनके हाथ में तब रहता है—
प्रश्न में मन से चुनी हुई गुणज ( multiple ) राशि द्वारा एक को भाजित करते हैं । इसमें
इस व्यापार में भाग लेनेवाले मनुष्यों की संगत संख्या जोड़ते हैं । इस प्रकार प्रथम मनुष्य के हाथ
का प्रारम्भिक धन प्राप्त होता है । यह और उसके बाद के फल क्रम में लिखे जाते हैं, और उनमें से
प्रत्येक को एक द्वारा बढ़ाई गई मन से चुनी हुई संख्या द्वारा गुणित किया जाता है, और फल को तब
एक द्वारा हासित करते हैं । इस प्रकार, प्रत्येक के पास का ( आरम्भ में उनके हाथ का ) धन ( जितना
था, उतना ) प्राप्त होता जाता है ॥ २६५½ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
३ व्यापारियों में से प्रत्येक ने दूसरों को जितना उनके पास उस समय था उतना दिया । तब
वे समान धनवान् बन गये । उनमें से प्रत्येक के पास अलग-अलग आरम्भ में कितनी-कितनी रकम
थी ? ॥२६६½॥ चार व्यापारी थे । उनमें से प्रत्येक ने दूसरों से उतनी रकम प्राप्त की जितनी कि उसके
( २६५½ ) गाथा २६६½ में दिये गये प्रश्न को निम्नरीति से हल करने पर नियम स्पष्ट
हो जावेगा—
१ को मन से चुने हुए गुणज ( multiple ) द्वारा भाजित करते हैं । इसमें मनुष्यों की संख्या
३ जोड़ने पर ४ प्राप्त होता है । यह प्रथम व्यक्ति के हाथ की रकम है । यह ४, मन से चुने हुए गुणज
१ को १ द्वारा बढ़ाने से प्राप्त २ द्वारा गुणित होकर, ८ बन जाता है । जब इसमें से १ घटाया जाता है,
तो हमें ७ प्राप्त होता है, जो दूसरे आदमी के हाथ की रकम है ॥२६५½॥
यह ७ ऊपर की तरह २ द्वारा गुणित होकर, और फिर एक द्वारा हासित होकर १३ होता है,
जो तीसरे आदमी के हाथ की रकम है । यह हल निम्नलिखित समीकरण से सरलता पूर्वक प्राप्त हो
सकता है—
४ ( अ - ब - स ) = २ { २ ब - ( अ - ब - स ) - २ स } = ४ स - २ ( अ - ब - स ) -
{ २ ब - ( अ - ब - स ) - २ स }