गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
पृष्ठ 209, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ें-६. २५२½ ] मिश्रकव्यवहारः [ १५५
मार्गे त्रिभिर्वणिग्भिः पोट्टलकं दृष्टमाह तत्राद्यः ।
यद्यस्य चतुर्थांशं लभेऽहमित्याह स युवयोर्द्विगुणः ॥ २४९ ॥
आह त्रिभागमपरः स्वहस्तधनसहितमेव च त्रिगुणः ।
अस्यार्धं प्राप्याहं तृतीयपुरुषश्चतुर्गुधनवान् स्याम् ।
आचक्ष्व गणक शीघ्रं किं हस्तगतं च पोट्टलकम् ॥ २५०½ ॥
याचितरूपैरिष्टगुणकहस्तगतानयनस्य सूत्रम्—
याचितरूपैक्यानि स्वसैकगुणवर्धितानि तैः प्राग्वत् ।
हस्तगतानां नीत्वा चेष्टगुणन्नेति सूत्रेण ॥ २५१½ ॥
सदृशच्छेदं कृत्वा सैकैष्टगुणाहतेष्टगुणयुत्या ।
रूपोनितया भक्तान् तानेव करस्थितान् विजानीयात् ॥ २५२½ ॥
कहा, “यदि मुझे इस थैली का ¼ धन मिल जाय, तो मैं अपने हाथ की रकम मिलाकर तुम सभी के
कुलधन से दुगुने धनवाला हो जाऊँ ।” दूसरे ने कहा, “यदि मुझे थैली का ⅓ धन मिल जाय, तो उसे
मिलाकर मैं तुम सभी के कुल धन से तिगुने धनवाला हो जाऊँ ।” तीसरे ने कहा, “यदि मुझे थैली
का आधा धन मिल जाय तो उसे मिलाकर मैं तुम दोनों के कुल धन से चौगुने धनवाला हो जाऊँ ।”
हे गणितज्ञ ! शीघ्र ही उनके हाथ की रकमें तथा थैली की रकम अलग-अलग बतलाओ ॥ २४९–२५०½ ॥
हाथ की ऐसी रकम निकालने का नियम, जो दूसरे से माँगे हुए धन में मिलने पर दूसरों के
हाथ की रकमों का निर्दिष्ट अपवर्त्य बन जाती है :—
माँगी हुई रकमों को अलग-अलग निज की संगत, अपवर्त्य ( multiple ) राशि में एक
जोड़ने से प्राप्तफल द्वारा गुणित करते हैं । इन गुणनफलों की सहायता से गाथा २४१ में दिये गये
नियम द्वारा हाथ की रकमों को प्राप्त कर लेते हैं । इस प्रकार प्राप्त इन राशियों को साधारण हरवाली
बनाते हैं । प्रत्येक एक द्वारा बढ़ाई गईं अपवर्त्य ( multiple ) राशियों द्वारा क्रमशः निर्दिष्ट अप-
वर्त्य राशियों को भाजित करते हैं । तब साधारण हरवाली राशियों को अलग-अलग इन प्राप्त फलों के
एकोन योग द्वारा भाजित करते हैं । इन परिणामी भजनफलों को विभिन्न मनुष्यों के हाथों की रकमें
समझना चाहिये ॥ २५१½-२५२½ ॥
( २५१½–२५२½ ) बीजीय रूप से,
[ (अ + ब) (म + १) + म (स + द) (न + १)
[ क - { ─────────────────────────────────── +
न + १
(अ + ब) (म + १) + म (इ + फ) (प + १)
─────────────────────────────────── + .........
प + १
··· + ··· इत्यादि— (श - २) (अ + ब) (म + १) } ÷ (म + १) ] ÷
( म + न + प - १ )
───── ───── ─────
म + १ न + १ प + १
इसी प्रकार ख, ग के लिये, इत्यादि । यहाँ अ, ब, स, द, इ, फ एक दूसरे से माँगी हुई रकमें हैं ।