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सर्वकोश
गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 200, कुल 421 में से

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पृष्ठ 200

१४६ ] गणितसारसंग्रहः [ ६. २१७-
अत्रोद्देशकः
कामुकपुरुषाः पञ्च हि वेश्यायाश्च प्रियास्त्रयस्तत्र ।
प्रत्येकं सा ब्रूते त्वमिष्ट इति कानि सत्यानि ॥२१७॥
प्रस्तारयोगभेदस्य सूत्रम्—
एकाद्येकोत्तरतः पदमूर्ध्वाधर्गतः क्रमोत्क्रमशः ।
स्थाप्य प्रतिलोमघ्नं प्रतिलोमघ्नेन भाजितं सारम् ॥२१८॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
पाँच कामुक व्यक्ति हैं । उनमें से तीन व्यक्ति वास्तव में वेश्या द्वारा चाहे जाते हैं । वह
प्रत्येक से अलग-अलग कहती है, “मैं केवल तुम्हें चाहती हूँ ।” उसके कितने ( व्यक्त और उप-
लक्षित ) वचन सत्य हैं ? ॥२१७॥
दी हुई वस्तुओं में ( सम्भव ) संचयों के प्रकारों सम्बन्धी नियम—
एक से आरम्भकर, संख्याओं को, दी गई वस्तुओं की संख्या तक एक द्वारा बढ़ाकर, नियमित
क्रम में और व्यस्तक्रम में ( क्रमशः ) एक ऊपर और एक नीचे क्षैतिजपंक्ति में लिखो । यदि ऊपर
की पंक्ति में दाहिने से बाएँ ओर को लिया गया ( एक, दो, तीन अथवा अधिक संख्याओं का ) गुणन-
फल, नीचे की पंक्ति में भी दाहिने से बाएँ ओर को लिये गये ( एक, दो, तीन अथवा अधिक संख्याओं
के संगत ) गुणनफल द्वारा भाजित किया जाय, तो प्रत्येक दशा में ऐसे संचय की इष्ट राशि फलस्वरूप
प्राप्त होती है ॥ २१८ ॥
निरूपण से स्पष्ट हो जावेगा—
मानलो कुल मनुष्यों की संख्या अ है जिनमें से ब चाहे जाते हैं । वचनों की संख्या अ है,
और प्रत्येक वचन अ मनुष्यों के बारे में है, इसलिये वचनों की कुल संख्या अ × अ = अ² है । अब
इन अ मनुष्यों में से ब मनुष्य चाहे जाते हैं, और अ — ब चाहे नहीं जाते । जब ब मनुष्यों में से
प्रत्येक को यह कहा जाता है, 'केवल तुम्हीं चाहे जाते हो', तब प्रत्येक दशा में असत्य वचन ब — १
हैं ; इसलिये असत्य वचनों की ब वचनों में कुल संख्या ब ( ब — १ ) है...................( १ )
जब फिर से वही कथन अ — ब मनुष्यों में से प्रत्येक को कहा जाता है तब प्रत्येक दशा में असत्य
कथनों की संख्या ब + १ है । इसलिये अ — ब वचनों में कुल असत्य वचनों की संख्या (अ — ब) (ब + १)
है...(२) (१) और (२) का योग करने पर, हमें ब ( ब — १) + (अ — ब) (ब + १) = अ (ब + १)
— २ ब प्राप्त होता है । यह असत्य वचनों की कुल संख्या को निरूपित करती है । इसे अ² में से घटाने
पर, जो कि सब सत्य और असत्य वचनों की कुल संख्या है, हमें सत्य वचनों की संख्या प्राप्त होती है ।
( २१८ ) यह नियम संचय ( combination ) के प्रश्न से सम्बन्ध रखता है । यहाँ दिया
गया सूत्र यह है—
न (न — १) (न — २)······(न — र + १) |__ न
----------------------------------- और यह स्पष्ट रूप से ------------ के तुल्य है ।
१ ˙ २ ˙ ३·········र |__ र |__ न — र
( २२६ ) नियम में दिया गया सूत्र बीजीय रूप से निम्न प्रकार है—
अदा / अदा \ ²
--- - √ ( --- ) — अबद ( दा — द )
२ \ २ /
क = ---------------------------------------- , जहाँ क = निकाली जाने वाली मजदूरी
दा — द