गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
पृष्ठ 161, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ें-६. ७८½ ] मिश्रकव्यवहारः [ १७७
केनापि संप्रयुक्ताशीतिः पञ्चकशतप्रयोगेण ।। ७४½ ।।
अष्टाद्यष्टोत्तरतस्तदशीत्यष्टांशगच्छेन । मूलधनं दत्त्वाष्टाद्यष्टोत्तरतो धनस्य मासार्धात् ।। ७५½ ।।
वृद्धिं प्रादान्मूलं वृद्धिश्च विमुक्तिकालश्च । एषां परिमाणं किं विगणय्य सखे समाचक्ष्व ।। ७६½ ।।
एकीकरणसूत्रम्—
वृद्धिसमासं विभजेन्मासफलैक्येन लब्धमिष्टः कालः । कालप्रमाणगुणितस्तदिष्टकालेन संभक्तः ।।
वृद्धिसमासेन हतो मूलसमासेन भाजितो वृद्धिः ।। ७७½ ।।
अत्रोद्देशकः
युक्ता चतुरशतीह द्विकत्रिकपञ्चकचतुष्कशतेन । मासाः पञ्च चतुर्द्वित्रयः प्रयोगैककालः कः ।।७८½।।
इति मिश्रकव्यवहारे वृद्धिविधानं समाप्तम् ।
वाले ऋण की मुक्ति के लिये ८० को महत्तम रकम चुना । इसके साथ, ८ प्रथम किस्त की रकम थी
जो प्रति ½ माह में उत्तरोत्तर ८ द्वारा बढ़ती चली गई । इस प्रकार, उसने समान्तर श्रेढि के योग
को ऋण रूप में चुकाया । इस समान्तर श्रेढि में ८०/८ पदों की संख्या थी। इन ८ के अपवर्त्यो पर
ब्याज भी चुकाया गया । हे मित्र ! श्रेढि के योग की संवादी ऋण की रकम, चुकाया गया ब्याज
और ऋण मुक्ति का समय अच्छी तरह गणना कर निकालो ।। ७३½-७६ ।।
औसत साधारण ब्याज को निकालने के लिये नियम —
( विभिन्न उपार्जित होने वाले ) ब्याजों के योग को ( विभिन्न संवादी ) एक माह के दातव्य
ब्याजों के योग द्वारा विभाजित करने पर परिणामी भजनफल, इष्ट समय होता है । ( काल्पनिक )
समयदर और मूलधनदर के गुणनफउ को इष्ट समय द्वारा विभाजित करते हैं और ( उपार्जित होने
वाले विभिन्न ) ब्याजों के योग द्वारा गुणित करते हैं । प्राप्तफल को विभिन्न दिये गये मूलधनों के
योग द्वारा फिर से विभाजित करते हैं । इससे इष्ट ब्याज दर प्राप्त होती है । ॥ ७७-७७½ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
इस प्रश्न में, चार सौ की ४ रकमें अलग-अलग क्रमशः २, ३, ५ और ४ प्रतिशत प्रतिमास की
दर से ५, ४, २ और ३ माहों के लिये ब्याज पर लगाई गईं । औसत साधारण अवधि और ब्याजदर
निकालो ।। ७८½ ।।
इस प्रकार, मिश्रक व्यवहार में वृद्धि विधान नामक प्रकरण समाप्त हुआ ।
( ७७ और ७७½ ) विभिन्न उत्पन्न होने वाले ब्याज वे होते हैं जो अलग-अलग रकमों के, विभिन्न
दरों पर उनकी क्रमवार अवधियों के लिये ब्याज होते हैं ।
प्रतीक रूप से, { (ध₁ × अ₁ × बा₁) / (आ × घा) + (ध₂ × अ₂ × बा₂) / (आ × घा) + ............ } ÷
{ (ध₁ × १ × बा₁) / (आ × घा) + (ध₂ × १ × बा₂) / (आ × घा) + ............ }
= अ_औ अथवा औसत अवधि ;
और [(घा × आ) / अ_औ] × { (ध₁ × अ₁ × बा₁) / (आ × घा) + (ध₂ × अ₂ × बा₂) / (आ × घा) + ............ } ÷
( ध₁ + ध₂ + ............ ) = ब_औ अथवा औसत ब्याज ।