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सर्वकोश
गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 152, कुल 421 में से

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पृष्ठ 152

९८ ] गणितसारसंग्रहः [ -६. ३५
मूलकालवृद्धि मिश्रविभागानयनसूत्रम्—
मिश्रादूनितराशिः कालस्तस्यैव रूपलाभेन । सैकेन भजेन्मूलं स्वकालमूलोनितं फलं मिश्रम् ॥३५॥
अत्रोद्देशकः
पञ्चकशतप्रयोगे न ज्ञातः कालमूलफलराशिः । तन्मिश्रं द्वां¹शीतिर्मूलं किं कालवृद्धी के ॥ ३६ ॥
बहुमूलकालवृद्धि मिश्रविभागानयनसूत्रम्—
विभजेत्स्वकालताडितमूलसमासेन फलसमासहतम् ।
कालाभ्यस्तं मूलं पृथक् पृथक् चादिशेद् वृद्धिम् ॥ ३७ ॥
अत्रोद्देशकः
चत्वारिंशत्त्रिंशद्विंशतिपञ्चाशदत्र मूलानि । मासाः पञ्चचतुस्त्रिकषट् फलपिण्डश्चतुस्त्रिंशत् ॥३८॥
१ हस्तलिपि में यह अशुद्ध रूप प्राप्य है; शुद्ध रूप 'द्व्यशीति' छंद की आवश्यकता को समाधानित
नहीं करता है ।
मूलधन, ब्याज और समय को उनके मिश्रयोग में से अलग-अलग प्राप्त करने के लिये नियम—
दिये गये मिश्रयोग में से कोई मन से चुनी हुई संख्या को घटाने पर इष्ट समय प्राप्त हुआ
मान लिया जाता है । उस अवधि के लिये १ पर ब्याज निकालकर उसमें १ जोड़ते हैं । तब, दिये गये
मिश्रितयोग में से मन से चुनी गई अवधि घटाकर शेष राशि को उपर्युक्त प्राप्त राशि द्वारा विभाजित
करते हैं । परिणामी भजनफल इष्ट मूलधन होता है । मिश्रयोग को निज के संवादी समय और मूलधन
द्वारा ह्रासित करने पर इष्ट ब्याज प्राप्त होता है ॥३५॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
५ प्रतिशत प्रतिमाह के अर्घ से उधार दी गई रकम के विषय में अवधि, मूलधन और ब्याज का
निरूपण करने वाली राशियाँ ज्ञात नहीं हैं । उनका मिश्रयोग ८२ है । अवधि, मूलधन और ब्याज
निकालो ॥३६॥
विभिन्न धनों पर विभिन्न अवधियों में उपार्जित विभिन्न ब्याजों को उन्हीं के मिश्रयोग में से
अलग-अलग ब्याज प्राप्त करने के लिये नियम—
प्रत्येक मूलधन संवादी समय से गुणित होकर तथा ब्याजों की कुल दत्त रकम द्वारा गुणित
होकर, अलग-अलग उन गुणनफलों के योग द्वारा विभाजित किया जाता है जो प्रत्येक मूलधन को
उसके संवादी समय द्वारा गुणित करने पर प्राप्त होते हैं । प्राप्त फल उस मूलधन सम्बन्धी ब्याज
घोषित किया जाता है ॥३७॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
इस प्रश्न में दिये गये मूलधन ४०, ३०, २० और ५० हैं; और मास क्रमशः ५, ४, ३ और
६ हैं । ब्याज की राशियों का योग ३४ है । प्रत्येक ब्याज राशि निकालो ॥३८॥
(३५) यहाँ ३ अज्ञात राशियाँ दी गई हैं । समय का मान मन से चुन लिया जाता है और अन्य
दो राशियाँ अध्याय ६ की २१वीं गाथा के नियमानुसार प्राप्त हो जाती हैं ।
(३७) प्रतीक रूप से, ध₁ अ₁ म = ब₁; और
─────────────────────
ध₁अ₁ + ध₂अ₂ + ध₃अ₃ + ...
ध₂ अ₂ म
───────────────────── = ब₂; जहाँ म = ब₁ + ब₂ + ब₃ + ...; ध₁, ध₂, ध₃
ध₁अ₁ + ध₂अ₂ + ध₃अ₃ + ...
आदि विभिन्न मूलधन हैं तथा अ₁, अ₂, अ₃ आदि विभिन्न अवधियाँ हैं ।