गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
पृष्ठ 148, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ें९४ ] गणितसारसंग्रहः [ ६. १५–
अत्रोद्देशकः
सप्तार्धशतकयोगे वृद्धिरस्त्वष्टाप्रविंशतिरशीत्या ।
कालेन केन लब्धा कालं विगणय्य कथय सखे ॥ १५ ॥
विंशतिषट्शतकस्य प्रयोगतः सप्तगुणषष्टिः । वृद्धिरपि चतुरशीतिः कथय सखे कालमाशु त्वम् ॥१६॥
षट्कशतेन हि युक्ताः षण्णवतिर्वृद्धिरत्र संदृष्टा । सप्रोत्तरपञ्चाशत् त्रिपञ्चभागश्च कः कालः ॥१७॥
भाण्डप्रतिभाण्डसूत्रम्—
भाण्डस्वमूल्यभक्तं प्रतिभाण्डं भाण्डमूल्यसंगुणितम् ।
स्वेच्छाभाण्डाभ्यस्तं भाण्डप्रतिभाण्डमूल्यफलमेतत् ॥ १८ ॥
अत्रोद्देशकः
क्रीतान्यष्टौ शुण्ठ्याः पलानि षड्भिः पणैः सपादांशैः ।
पिप्पल्याः पलपञ्चकमथ पादोनैः पणैर्नवभिः ॥ १९ ॥
शुण्ठ्याः पलैश्च केनचिदशीतिभिः कति पलानि पिप्पल्याः ।
क्रीतानि विचिन्त्य त्वं गणितविदाचक्ष्व मे शीघ्रम् ॥ २० ॥
इति मिश्रकव्यवहारे पञ्चराशिविधिः समाप्तः ।
वृद्धिविधानम्
इतः परं मिश्रकव्यवहारे वृद्धिविधानं व्याख्यास्यामः ।
१ M और B दोनों में अशुद्ध पाठ है : कश्चित् त्वशीतिभिः स च पलानि पिप्पल्याः.
उदाहरणार्थ प्रश्न
हे मित्र ! अवधि की गणना कर बतलाओ कि ३½ प्रतिशत प्रतिमाह के अर्घ से ८० पर २८
ब्याज कितने समय में प्राप्त होगा ? ॥१५॥ २० प्रति ६०० प्रतिमाह के अर्घ से उधार दिया गया धन
४२० है । ब्याज भी ८४ है । हे मित्र ! मुझे शीघ्र बतलाओ कि यह ब्याज कितनी अवधि में उपार्जित
हुआ है ?॥१६॥ ६ प्रतिशत प्रतिमाह के अर्घ से ९६ उधार दिये जाते हैं । उन पर ५७⅗ ब्याज होता
है । यह ब्याज कितनी अवधि में प्राप्त हुआ होगा ? ॥१७॥
भांडप्रतिभांड (वस्तुओं के पारस्परिक विनिमय) के सम्बन्ध में नियम —
बदले में ली गई वस्तु के परिमाण को उसके स्वमूल्य तथा बदले में दी गई वस्तु के परिमाण
द्वारा विभाजित करते हैं । तब, उसे बदले में दी गई वस्तु के मूल्य द्वारा गुणित करते हैं और तब,
बदली जाने वाली (जिसे बदलना इष्ट है) वस्तु के परिमाण द्वारा गुणित करते हैं। यह परिणामी
गुणनफल, बदले में ली गई वस्तु तथा बदले में दी गई वस्तु के मूल्यों की संवादी इष्ट राशि
होती है ॥१८॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
८ पल शुण्ठि (सूखी अदरख) ६¼ पण में खरीदी गई और ५ पल लम्बी मिर्च ८¾ पण में
खरीदी गई । हे गणितज्ञ ! विचारकर मुझे शीघ्र बतलाओ कि ऊपर लिखी हुई दर से खरीदी जाने वाली
लम्बी मिर्च, ८० पल सूखी अदरख (सोंठ) के बदले में कितने पल खरीदी जा सकेगी ? ॥१९–२०॥
इस प्रकार, मिश्रक व्यवहार में पंचराशिक विधि नामक प्रकरण समाप्त हुआ ।
वृद्धि विधान [ब्याज]
इसके पश्चात्, मिश्रक व्यवहार में हम ब्याज पर व्याख्या करेंगे ।