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गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 142, कुल 421 में से

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पृष्ठ 142

८८ ] गणितसारसंग्रहः [ ५. ३२ -
पञ्चसप्तनवराशिकेषु करणसूत्रम्—
लोभं नीत्वान्योन्यं विभजेत् पृथुपङ्क्तिमल्पया पंक्त्या ।
गुणयित्वा जीवानां क्रयविक्रययोस्तु तानेव ॥ ३२ ॥
अत्रोद्देशकः
द्वित्रिचतुःशतयोगे पञ्चाशत्षष्टिसप्ततिपुराणाः । लाभार्थिना प्रयुक्ता दशमासेष्वस्य का वृद्धिः ॥३३॥
हेम्नां सार्धाशीतेर्मासत्र्यंशेन वृद्धिरध्यर्धा । सत्रिचतुर्थनवत्याः कियती पादोनषण्मासैः ॥३४॥
१ P में निम्नलिखित पाठान्तर है ।
प्रकारान्तरेण सूत्रम्—
संक्रम्य फलं छिन्द्याल्लघुपंक्त्यानेकराशिकां पंक्तिम् । स्वगुणामश्वादीनां क्रयविक्रययोस्तु तानेव ।
अन्यदपि सूत्रम्—
संक्रम्य फलं छिन्द्यात् पृथुपंक्त्यभ्यासमन्यया पंक्त्या । अश्वादीनां क्रयविक्रययोरश्वादिकांश्च संक्रम्य ॥
B केवल बाद का श्लोक दिया गया है जिसके दूसरे चौथाई भाग का पाठान्तर यह है—
पृथुपंक्त्यभ्यासमल्पपंक्त्याहृत्या ।
साथ गुणित करने के पश्चात् ), सबको साथ लेकर गुणित की गई विभिन्न राशियों की छोटी संख्याओं
वाली पंक्ति द्वारा विभाजित करना चाहिये । परन्तु, जीवित पशुओं को बेचने और खरीदने के प्रश्नों में
केवल उन्हें प्ररूपण करनेवाली संख्याओं के सम्बन्ध में ही पक्षान्तरण करते हैं ॥३२॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
किसी व्यक्ति द्वारा ५०, ६० और ७० पुराण क्रमशः २, ३ और ४ प्रतिशत प्रतिमास के अर्घ
( दर ) से लाभ के लिये ब्याज पर दिये गये । दस माह में उसे कितना ब्याज प्राप्त होगा ? ॥३३॥
१/३ मास में ८० १/२ स्वर्ण मुद्राओं पर ब्याज १ १/२ होता है । ५ ३/४ माह में ९० ३/४ स्वर्ण मुद्राओं पर वह
कितना होगा ? ॥३४॥ वह जो १६ वर्ण के १०० स्वर्ण खंडों में २० रत्न प्राप्त करता है तो १० वर्ण
( ३२ ) फल का पक्षान्तरण तथा अन्य कथित क्रियायें निम्नलिखित साधित उदाहरण से स्पष्ट हो
जावेंगी । गाथा ३६ के प्रश्न में दिया गया न्यास ( data ) प्रथम निम्न प्रकार प्ररूपित किया जाता है ।
९ मानी | १ वाह + १ कुम्भ
३ योजन | १० योजन
६० पण |
जब यहाँ फल, जो ६० पण है, को अन्य पंक्ति में पक्षान्तरित करते हैं तब—
९ मानी | १ वाह + १ कुम्भ = १ १/४ वाह
३ योजन | १० योजन
| ६० पण
अब, जिसमें विभिन्न राशियों की संख्या अधिक है ऐसी दाहिने हाथ की पंक्ति की सब राशियों को
गुणित कर उसे वाम पंक्ति (जिसमें विभिन्न राशियों की संख्या कम है) की सब राशियों को गुणित करने से
प्राप्त गुणनफल द्वारा भाजित करना चाहिये । तब हमें पणों की संख्या प्राप्त होगी जो कि इष्ट उत्तर होगा ।
यथा, (१ १/४ × १० × ६०) / (९ × ३)