गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
पृष्ठ 137, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ें५. त्रैराशिकव्यवहारः
त्रिलोकबन्धवे तस्मै केवलज्ञानभानवे । नमः श्रीवर्धमानाय निर्धूताखिलकर्मणे ॥ १ ॥
इतः परं त्रैराशिकं चतुर्थव्यवहारमुदाहरिष्यामः ।
तत्र करणसूत्रं यथा—
त्रैराशिकेऽत्र सारं फलमिच्छासंगुणं प्रमाणाप्तम् ।
इच्छाप्रमयोः साम्ये विपरीतेयं क्रिया व्यस्ते ॥ २ ॥
पूर्वार्धोद्देशकः
दिवसैस्त्रिभिः सपादैर्योजनषट्कं चतुर्थभागोनम् । गच्छति यः पुरुषोऽसौ दिनयुतवर्षेण किं कथय ॥३॥
व्यर्धाष्टाभिरहोभिः क्रोशाष्टांशं स्वपञ्चमं याति ।
पङ्गुः सपञ्चभागैर्वर्षैस्त्रिभिरत्र किं ब्रूहि ॥ ४ ॥
अङ्गुलचतुर्थभागं प्रयाति कीटो दिनाष्टभागेन । मेरोर्मूलाच्छिखरं कतिभिरहोभिः समाप्नोति ॥५॥
१ P, K और M में स्व के लिये स पाठ है ।
५. त्रैराशिकव्यवहार
तीनों लोकों के बन्धु तथा सूर्य के समान केवल ज्ञान के धारी श्री वर्द्धमान को नमस्कार है
जिन्होंने समस्त कर्म ( मल ) को निर्धूत कर दिया है । ॥१॥
इसके पश्चात्, हम त्रैराशिक नामक चतुर्थ व्यवहार का प्रतिपादन करेंगे ।
त्रैराशिक सम्बन्धी नियम—
यहाँ त्रैराशिक नियम में, फल को इच्छा द्वारा गुणित कर प्रमाण द्वारा विभाजित करने से
इष्ट उत्तर प्राप्त होता है, जब कि इच्छा और प्रमाण समान ( अनुक्रम direct अनुपात में ) होते
हैं । जब यह अनुपात प्रतिलोम ( inverse ) होता है तब यह गुणन तथा भाग की क्रिया विपरीत हो
जाती है ( ताकि भाग की जगह गुणन हो और गुणन के स्थान में भाग हो ) । ॥२॥
पूर्वार्ध, अनुक्रम त्रैराशिक पर उदाहरणार्थ प्रश्न
वह मनुष्य जो ३ १/४ दिन में ५ ३/४ योजन जाता है, १ वर्ष और १ दिन में कितनी दूर जाता है ?
॥३॥ एक लंगड़ा मनुष्य ७ १/२ दिन में एक क्रोश का १/८ तथा उसका १/५ भाग चलता है । बतलाओ वह
३ १/५ वर्षों में कितनी दूरी तय करता है ? ॥४॥ एक कीड़ा १/८ दिन में १/४ अंगुल चलता है । बतलाओ कि
वह मेरुपर्वत की तली से उसके शिखर पर कब पहुँचेगा ? ॥५॥ वह मनुष्य जो ३ १/२ दिन में १ १/४ कार्षा-
( २ ) प्रमाण और फल के द्वारा अर्घ ( rate ) प्राप्त होती है । फल, इष्ट उत्तर के समान
राशि होती है और प्रमाण, इच्छा के समान होता है । 'इच्छा' वह राशि है जिसके विषय में, किसी अर्घ
( दर ) से, कोई वस्तु निकालना होती है । जैसे कि गाथा ३ के प्रश्न में ३ १/४ दिन प्रमाण है, ५ ३/४ योजन
फल है, और १ वर्ष १ दिन इच्छा है ।
( ५ ) मेरु पर्वत की ऊँचाई ९९,००० योजन अथवा ७६,०३२,०००,००० अंगुल मानी जाती है ।