गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)
Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary
भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 92, कुल 130 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । (९१)
शक्योऽहं वीक्षितुं ज्ञातुं प्रवेष्टुं भक्तिभावतः ॥
त्यज भीतिं च मोहं च पश्यमां सौम्यरूपिणम् २५
मैं भक्तिभावसे जाननेकूं दीखनेकूं प्राप्त होनेकूं समर्थ हूं अब
तू भय और मोहको त्याग कर मेरे योग्य रूपको देख ॥२५॥
मद्भक्तो मत्परः सर्वसंगहीनो मदर्थकृत् ॥
निष्क्रोधःसर्वभूतेषु समो मामेति भूभुज ॥२६॥
ॐ तत्सदिति श्रीमद्गणेशगीतासूपनिषदर्थगर्भासु यो-
गामृतार्थशास्त्रे श्रीगणेशपुराण उत्तरखण्डे
श्रीगजानवरेण्यसंवादे विश्वरूपदर्शनो
नामाष्टमोऽध्यायः ॥ ८ ॥
हे राजन् ! जो भक्त मेरे परायण सर्व संगत्यागी सब कर्म-
हीमें समर्पण करते हैं, और क्रोध त्यागन कर सर्व प्राणियोंमें
समान दृष्टि करते हैं, वह मुझको प्राप्त होते हैं ॥ २६ ॥
ॐ तत्सदिति श्रीमद्गणेश० योगामृतार्षशास्त्रे श्रीगणेशपु०
पण्डितज्वालाप्रसादमिश्रकृतभाषाटीकायां विश्वरूपदर्शनो
नामाष्टमोऽध्यायः ॥ ८ ॥