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सर्वकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 84

भाषाटीकासमेत । ( ८३ )
यह जो कुछ भी करे सब मुझे निवेदन करदे मेरे आश्रय
करनेवाले स्त्री दुराचारी पापी क्षत्रिय वैश्य शूद्रादि ॥ २२ ॥
मदाश्रया विमुच्यंते किं मद्भक्त्या द्विजातयः ॥
न विनश्यति मद्भक्तो ज्ञात्वेमा मद्दिभूतयः २३॥
यह भी तो मेरा आश्रय करनेसे मुक्त होजाते हैं फिर मेरे
भक्तोंकी तौ बातही क्या है, मेरा भक्त यह मेरी विभूति
जानकर कभी नष्ट नहीं होता है ॥ २३ ॥
प्रभवं मे विभूतीश्च न देवा ऋषयो विदुः ॥
नानाविभूतिभिरहं व्याप्य विश्वं प्रतिष्ठितः २४
मेरे प्रभव ( उत्पत्ति ) और मेरी विभूतियों को देवता और
ऋषिभी नहीं जानते, मैं अनेक विभूतियोंसे विश्वमें व्याप्त
होकर स्थित हूं ॥ २४ ॥
यद्यच्छ्रेष्ठतमं लोके सा विभूतिर्निबोध मे ॥२५॥
ॐतत्सदिति श्रीमद्गणेशगीतासूपनिषदर्थगर्भासु योगामृ-
तार्थशास्त्रे उत्त० श्रीगजाननवरेण्यसंवादे उपास-
नायोगोनाम सप्तमोऽध्यायः ॥ ७ ॥