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सर्वकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 76

भाषाटीकासमेत । ( ७५ )
मुझ अव्यक्त गुप्त स्वरूपको कामसे मोहित दृष्टिवाले कोई
नहीं जानते हैं, अज्ञानी और पापी पुरुषोंको मैं प्रगट नहीं
होता हूं ॥ १५ ॥
यः स्मृत्वा त्यजति प्राणमन्ते मां श्रद्धयान्वितः॥
स यात्यपुनरावृत्तिं प्रसादान्मम भूभुज ॥ १६ ॥
जो अन्तसमय श्रद्धायुक्त होकर मुझे स्मरणकर अपना
शरीर त्याग करता है, हे राजन् ! वह मेरी कृपासे मुक्त
हो जाता है ॥ १६ ॥
यंयं देवं स्मरन्भक्त्या त्यजति स्वं कलेवरम् ॥
तत्तत्सालोक्यमायाति तत्तद्भक्त्या नराधिप १७
भक्तिपूर्वक जिस जिस देवताको यह प्राणी स्मरण करता
हुआ कलेवरको त्याग करता है, हे राजन् ! उनकी भक्ति
करनेसे उन्हींके लोकको प्राप्त होता है ॥ १७ ॥
अतश्चाहर्निशं भूप स्मर्तव्योऽनेकरूपवान् ॥
सर्वेषामप्यहं गम्यः स्रोतसामर्णवो यथा ॥१८॥
इस कारण हे राजन् ! रातदिन मेरे अनेक रूप स्मरण ,
करने योग्य हैं, सबको मैं ही प्राप्त होता हूं; जैसे नदियोंका