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सर्वकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 52

भाषाटीकासमेत । ( ५१ )
भक्तिहीनोऽश्रद्दधानः सर्वत्र संशयी तु यः ॥
तस्य शं नापि विज्ञानमिह लोकोऽथ वा परः ४८
और जो भक्तिहीन श्रद्धारहित सर्वत्र संदिग्धचित्त है, उसे
कल्याणकी प्राप्ति नहीं तथा दोनों लोककी प्राप्ति नहीं,क्योंकि
उसे ज्ञानही नहीं ॥ ४८ ॥
आत्मज्ञानरतं ज्ञाननाशिताखिलसंशयम् ॥
योगास्ताखिलकर्माणं बध्नन्ति भूप तानि न॥४९॥
जो आत्मज्ञानमें रत हैं, जिन्होंने ज्ञानसे सब संदेह दूर
किये हैं, हे राजन् उस योगमें स्थित पुरुषोंको कर्म नहीं लगते
कारण कि उन्होंने योगसे वे कर्म नष्ट करादिये हैं ॥ ४९ ॥
ज्ञानखङ्गप्रहारेण संभूतामज्ञतां बलात् ॥
छित्त्वान्तःसंशयं तस्माद्योगयुक्तो भवेन्नरः ५०॥
ॐ तत्सदिति श्रीमद्गणेशगीतासूपनिषदर्थगर्भासु योगामृ-
तार्थशास्त्रे श्रीगणेशपुराणे उ० श्रीगजाननवरेण्य-
संवादे विज्ञानप्रतिपादनो नाम
तृतीयोऽध्यायः ॥ ३ ॥