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सर्वकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 33

( ३२ ) गणेशगीता-अ० २.
हे महामतिमान् राजा ! तब मेरे ऐसा करनेसे सब वर्ण
आचार भ्रष्ट हो जायँगे, इससे इस वर्णसंकरका करने-
वाला भी मैं ही हूंगा ॥ २४ ॥
कामिनो हि सदा कामैरज्ञानात्कर्मकारिणः ॥
लोकानां संग्रहायैतद्विद्वान् कुर्यादसक्तधीः॥२५॥
जिस प्रकारसे कामनावाले अज्ञानसे सदा कर्म करते रहते
हैं, इसीप्रकार विद्वान्को उचित है कि लोकसंग्रहके निमित्त
आसक्ति रहित होकर कर्म करता रहे ॥ २५ ॥
विभिन्नत्वमतिं जह्यादज्ञानां कर्मचारिणाम् ॥
योगयुक्तः सर्वकर्माण्यर्पयेन्मयि कर्मकृत् ॥२६॥
अज्ञानसे कर्म करनेवालोंकी भेदबुद्धिको त्याग करै,
योगयुक्त होकर कर्म करताहुआ वे सब कर्म मुझे अर्पण
करदे ॥ २६ ॥
अविद्यागुणसाचिव्यात्कुर्वन्कर्माण्यतन्द्रितः ॥
अहंकाराद्भिन्नबुद्धिरहंकर्तेति योऽब्रवीत् ॥२७॥
हे राजन् ! सबही कर्म प्रकृतिके सत्त्वादि गुणोंने किये हैं,
तथापि अहंकारसे मूढ होकर पुरुष अपनेको कर्ता मानता है २७