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सर्वकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 28

भाषाटीकासमेत । ( २७ )
कर्मयोगका अनुष्ठान करता है, वही फलकी कामना न
करनेवाला ही श्रेष्ठ है ॥ ६ ॥
अकर्मणः श्रेष्ठतमं कर्मानीहाकृतं तु यत् ॥
वर्ष्मणः स्थितिरप्यस्याकर्मणो नैव सेत्स्यति॥७॥
कर्म न करनेसे फलकी कामना न करके कर्मका करना
श्रेष्ठ है कारण कि सब कर्मोंसे रहित होनेसे शरीरयात्रा भी
नहीं हो सकती ॥ ७ ॥
असमर्प्य निबध्यन्ते कर्म तेन जना मयि ॥
कुर्वीत सततं कर्मानिशोऽसंगो मदर्पणम् ॥८॥
प्राणी कर्मोंका फल मुझमें जो समर्पण नहीं करते, इसी
कारण वे बंधनमें पडते हैं, इस कारणसे निष्काम कर्मका अनु-
ष्ठान करना उचित है, और जो करो सब ईश्वरार्पण करो
और असंग अर्थात् उनमें आसक्ति मत करो ॥ ८ ॥
मदर्थे यानि कर्माणि तानि बध्नन्ति न क्वचित्॥
सवासनमिदं कर्म बध्नाति देहिनं बलात् ॥९॥
जो कर्म मेरे निमित्त किये जाते हैं वे बन्धनके निमित्त
नहीं होते, जो वासनापूर्वक कर्म हैं वे ही बलसे प्राणीको
बांधते हैं ॥ ९ ॥