गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)
Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary
भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( १२३ )
भादोंके महीनेके शुक्ल पक्षमें चौथके दिन भक्तिपूर्वक
मृत्तिकाकी चतुर्भुजी मूर्ति बनाकर ॥ ४९ ॥
सवाहनां सायुधां च समभ्यर्च्य यथाविधि ॥
यः पठेत्सप्तकृत्वस्तु गीतामेतां प्रयत्नतः॥५०॥
वाहन और आयुधसहित विधिपूर्वक पूजन करके,जो यत्न-
पूर्वक सातवार गीताका पाठ करता है ॥ ५० ॥
ददाति तस्य संतुष्टो गणेशो भोगमुत्तमम् ॥
पुत्रान्पौत्रान्धनं धान्यं पशुरत्नादिसंपदः ५१॥
उसको संतुष्ट होकर गणेशजी पुत्र, पौत्र, धन, धान्य, पशु,
रत्नादि संपत् और अनेक भोग प्रदान करते हैं ॥ ५१ ॥
विद्यार्थिनो भवेद्विद्या सुखार्थी सुखमाप्नुयात् ॥
कामानन्याँल्लभेतकामी मुक्तिमन्तेप्रयान्तिते ५२
इति श्रीगणेशपुराणे श्रीमद्गणेशगीतासूपनिषदर्थगर्भासु
योगामृतार्थशास्त्रे श्रीगजाननवरेण्यसम्वादे त्रिविध-
वस्तुविवेकनिरूपणं नामैकादशोऽध्यायः॥११॥
श्रीगजाननार्पणमस्तु ॥