सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

पृष्ठ 123, कुल 130 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 123

( १२२ ) गणेशगीता-अ० ११.
स्त्रीहिंसागोवधादीनां कर्त्तारो ये च पापिनः ॥
ते सर्वे प्रतिमुच्यन्ते गीतामेतां पठन्ति चेत्४६॥
स्त्रीहिंसा, गोवध करनेहारे तथा और भी पापी वे सब
इस गीताके पढनेसे छूट जाते हैं ॥ ४६ ॥
यः पठेत्प्रयतो नित्यं स गणेशो न संशयः ॥
चतुर्थ्यां यः पठेद्भक्त्या सोऽपिमोक्षाय कल्पते४७
जो नियमसे इसे नित्य पढते हैं वह निःसन्देह गणेश हैं,
और जो चतुर्थीके दिन भक्तिसे पढते हैं, वहभी मुक्त हो
जाते हैं ॥ ४७ ॥
तत्तत्क्षेत्रं समासाद्य स्नात्वाभ्यर्च्य गजाननम् ॥
सकृद्गीतां पठन्भक्त्या ब्रह्मभूयाय कल्पते ॥४८॥
उनउन क्षेत्रोंमें प्राप्त होकर स्नानकर गणेशजीका पूजन
कर एकवारभी भक्तिसे गीताका पाठ करै तौ, ब्रह्मस्वरूपको
प्राप्त होता है ॥ ४८ ॥
भाद्रे मासे सिते पक्षे चतुर्थ्यां भक्तिमान्नरः ॥
कृत्वा महीमयीं मूर्तिं गणेशस्य चतुर्भुजाम्४९॥