गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)
Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary
भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished130 पृष्ठ
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भाषाटीकासमेत । ( ११९ )
हे राजन् इस प्रकार तेरे स्नेहसे अंग उपांग सहित निस्तार
पूर्वक अनादि सिद्धयोग वर्णन किया, यह योग परमोत्तम है ३५
युंक्ष्व योगं मयाख्यातं नाख्यातं कस्यचिन्नृप ॥
गोपयैनं ततः सिद्धिं परां यास्यस्यनुत्तमाम् ३६
हे राजन् ! इस मेरे कहे योगको धारण करो और किसीसे
इसे मत कहो, जो तुम इसे गुप्त रखवोगे तो परम उत्तम सिद्धि-
को प्राप्त होगे ॥ ३६ ॥
व्यास उवाच ।
इति तस्य वचः श्रुत्वा प्रसन्नस्य महात्मनः ॥
गणेशस्य वरेण्यः स चकार च यथोदितम् ३७॥
व्यासजी बोले इस प्रकार प्रसन्नचित्त महात्मा गणेशजीके
वचन सुनकर राजा वरेण्य उनके वचनके अनुसार करता
हुआ ॥ ३७ ॥
त्यक्त्वा राज्यं कुटुम्बं च कान्तारंप्रययौ रयात् ।
उपदिष्टं यथा योगमास्थाय मुक्तिमाप्तवान् ३८॥