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सर्वकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 116

भाषाटीकासमेत । ( ११५ )
सुखं च त्रिविधं राजन्दुःखं च क्रमशः शृणु ॥
सात्त्विकं राजसं चैव तामसं च मयोच्यते २१॥
हे राजन् ! इसी प्रकार सुख दुःखभी तीन प्रकारके हैं, वह
तुम क्रमसे सुनो, इनकेभी सात्विक, राजस, तामस भेद हैं
सो मैं कहता हूं ॥ २१ ॥
विषवद्भासते पूर्वं दुःखस्यान्तकरं च यत् ॥
इच्छमानं तथा वृत्त्या यदन्तेऽमृतवद्भवेत् २२॥
जो पहले तौ विषकी समान प्रतीत हो और दुःखका अन्त
करनेवाला हो और मनोवृत्तिसे इच्छा किया हुआ जो अन्तमें
अमृतकी समान हो ॥ २२ ॥
प्रसादात्स्वस्य बुद्धेर्यत्सात्त्विकं सुखमीरितम् ॥
विषयाणां तु यो भोगो भासतेऽमृतवत्पुरा २३॥
और जो अपनी बुद्धिको प्रसन्न करनेहारा हो,वही सात्विक
सुख वर्णन किया है, और जो विषयोंका भोग प्रथम तौ
अमृतकी समान विदित हो ॥ २३ ॥
हालाहलमिवान्ते यद्राजसं सुखमीरितम् ॥
तन्द्राप्रमादसंभूतमालस्यप्रभवं च यत् ॥ २४ ॥