गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)
Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary
भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा
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हे राजन्!इस ज्ञानके विषयको मैं कहता हूं तुम श्रवण करो
जिसके जाननेसे संसारसागरसे छूटकर मुक्त होजाओगे॥२६॥
यदनादीन्द्रियैर्हीनं गुणभुग्गुणवर्जितम् ॥
अव्यक्तं सदसद्भिन्नमिन्द्रियार्थावभासकम्॥२७॥
जो अनादि इन्द्रियरहित सतरजतमके गुणोंका भोक्ता,
गुणवर्जित, अव्यक्त, सत्असत्से परे, इन्द्रियोंके विषयोंका
प्रकाशक ॥ २७ ॥
विश्वभृच्चाखिलव्यापि त्वेकं नानेव भासते ॥
बाह्याभ्यन्तरतः पूर्णमसंगं तमसः परम् ॥२८॥
विश्वका धारण करनेहारा, सम्पूर्णमें व्यापक, एकही ब्रह्म
अनेकरूपसे भासता है, वह बाह्य भीतरसे पूर्ण, असंग और
अंधकारसे परे हैं ॥ २८ ॥
दुर्ज्ञेयं चादिसूक्ष्मत्वादीप्तानामपि भासकम् ॥
ज्ञेयमेतादृशं विद्धि ज्ञानगम्यं पुरातनम् ॥२९॥
अत्यन्त सूक्ष्म होनेसे वह जाना नहीं जाता, ज्योतियोंका
भी प्रकाश करनेवाला है, इस प्रकार ज्ञानसे जानने योग्य
पुरातन पुरुषको ज्ञेय ब्रह्म जानो ॥ २९ ॥