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सर्वकोश
दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Durga Saptashati / Devi Mahatmyam with Commentary

महर्षि वेदव्यास / मार्कण्डेय पुराण द्वारा

DevanagariHindipublished156 पृष्ठ

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माँ का तुमको प्यार मिला है ।
मत समझो तुम हो एकाकी,
नहीं कोई जग में अवलम्ब मिला है
जब-जब ध्यान किया तुमने,
उसका ही सार-सम्भाल मिला है ।
माँ का तुमको प्यार मिला है ॥
सरिता के कल कल निनाद में
और सुमनों के मधुर हास में
भ्रमरों के मधुरिम गुञ्जन में
उसका ही स्वर साकार मिला है। माँ का तुमको.........।
जग-वैभव के काम भोग में
यतियों के अविराम योग में
प्रियतम के दारुण वियोग में
उसका ही आधार मिला है ॥ माँ का तुमको...........।
ज्ञानी की गहन चाह में
दीनों की करुण आह में
भ्रमितों की विषम राह में
वह जीवन पतवार मिला है ॥ माँ का तुमको.........।
तन्त्र-मन्त्र के गहन विज्ञान में
दुःख दैन्य के विषम विधान में
शान्ति सौम्य सँयुक्त विहान में
उसका दिव्य विचार मिला है ॥ माँ का तुमको.........।
—कुमारी रमा मिश्रा