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सर्वकोश
दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Durga Saptashati / Devi Mahatmyam with Commentary

महर्षि वेदव्यास / मार्कण्डेय पुराण द्वारा

DevanagariHindipublished156 पृष्ठ

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पृष्ठ 152

श्री दुर्गा सप्तशती पारिजात सौरभ [ १२८
आपत्सु मग्नः स्मरणं त्वदीयं
करोमि दुर्गे करुणार्णवेशि ।
नैतच्छठत्वं मम भावयेथाः
क्षुधातृषार्ता जननीं स्मरन्ति ॥
जगदम्ब विचित्रमत्र किं परिपूर्णा करुणास्ति चेन्मयि ।
अपराधपरम्पराऽऽवृत्तं न हि माता समुपेक्षते सुतम् ॥
मत्समः पातकी नास्ति पापघ्नी त्वत्समा न हि ।
एवं ज्ञात्वा महादेवि यथायोग्यं तथा कुरु ॥
श्री दुर्गा जी की आरती
जय अम्बे गौरी मैया जय मंगल मूर्ती,
मैया जय मंगल करणी, मैया जय आनन्द करणी ।
तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी ॥ जय अम्बे ॥ १ ॥
मांग सिन्दूर विराजत टीको मृगमद को, मैया टीको ⋯ ।
उज्जवल से दोऊ नैना चन्द्रबदन नीको ॥ जय अम्बे ॥ २ ॥
कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजे, मैया ⋯ ।
रक्त पुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै ॥ जय अम्बे ॥ ३ ॥
केहरि वाहन राजत खड्ग खप्पर धारी, मैया ⋯ ।
सुर नर मुनि जन सेवत, तिनके दुःख हारी ॥ जय अम्बे ॥ ४ ॥
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती, मैया ⋯ ।
कोटि चन्द्र दिवाकर राजत समज्योति ॥ जय अम्बे ॥ ५ ॥
शुम्भ-निशुम्भ विदारे, महिषासुर घाती, मैया ⋯ ।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती ॥ जय अम्बे ॥ ६ ॥
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे, मैया ⋯ ।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर नर भयहीन करे ॥ जय अम्बे ॥ ७ ॥
ब्रह्माणी, रुद्राणि, तुम कमला रानी, मैया ⋯ ।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ॥ जय अम्बे ॥ ८ ॥
चौसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरो, मैया ⋯ ।
बाजत ताल मृदंग, अरु बाजत डमरू ॥ जय अम्बे ॥ ९ ॥
तुम हो जग की माता तुम ही हो भरता, मैया ⋯ ।
भक्तन के दुःख हरता, सुख सम्पति करता ॥ जय अम्बे ॥ १० ॥
भुजा चार अति शोभित, वर अभय धारी, मैया ⋯ ।
मन वांछित फल पावत, सेवत नर-नारी ॥ जय अम्बे ॥ ११ ॥
कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती, मैया ⋯ ।
श्री माल केतु में राजत, कोटि रतन ज्योति ॥ जय अम्बे ॥ १२ ॥
अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावै, मैया ⋯ ।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख-सम्पत्ति पावै ॥ जय अम्बे ॥ १३ ॥