सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

DevanagariMarathipublished1,172 पृष्ठ

पृष्ठ 69, कुल 1172 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 69

ज्ञानेश्वरी
१
अर्जुनविषादयोग
ॐ नमो श्री आद्य । वेदप्रतिपाद्य ।
जय जय स्वयंवेद्य । आत्मरूप ॥१॥
देव तू ही श्री गणेश । सकल-मति प्रकाश ।
कहे निवृत्तिका दास । सुनियेजी ॥२॥
शब्द-ब्रह्म यह अशेष । वही है जो मूर्ति सुवेष ।
वहां वर्ण भी है निर्दोष । सजाया जो ॥३॥
स्मृति ही है ,अवयव । रेखायें अंगके भाव ।
लावण्य रूप वैभव । अर्थ शोभा ॥४॥
अष्टादश जो पुराण । वही हैं मणि-भूषण ।
पद पद्धति कोंदण । प्रमेय-रत्नका ॥५॥
पदबंध है वसन । रंगाया अति महीन ।
साहित्य शोभायमान । किनारी है ॥६॥
मानो है काव्य-नाटक । सोचनेसे स-कौतुक ।
पदकी क्षुद्रघंटिका । अर्थ-ध्वनि ॥७॥
अनेक तत्वोंका निरूपण । उसका नैपुण्य विलक्षण ।
उचित वचन सुलक्षण । दीखे रत्न-सम ॥८॥
१