ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)
Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमहादेव-
-का उपदेश ३ : ८५-१३६,
-का तप १७ : ३३६-३४१,
-की कालगणना ८ : १५४-१५९,
को पुनरावर्तन है ८ : १५२, ८ : १६६,
भक्ति-
अद्वैत- १८ : ११३७-११५१,
अंध- ७ : १३८-१५८,
अनन्य- ८ : १२४-१२६, ८ : १९२,
९ : ३३५-३३८, ११ : ६९६-६९८,
१२ : ३५-३८, १३ : ६०३-६१०
अभेद- १० : ११२-११८,
१४ : ३८१-३८७,
अव्यभिचारी- १४ : ३७२-३८७,
अज्ञान जन्य- ९ : १५५-१७१
-कर्ममें भक्ति ९ : ३९८-४०१,
११ : ७६-८१
-का अधिकार सबको ९ : ४४१-४७४,
-का फल ४ : ६३-६६, ८ : १२७-१३९,
९ : ३३८-३४३, १० : १३०-१४३,
१२ : ८३-९५
-का लक्षण ९ : ४११-४७४,
-की आवश्यकता ९ : ४९०-५१६,
कीर्तन- ९ : १९७-२१०,
--के चार प्रकार ७ : १०९-१११
-के मुख्य कारण भाव ९ : ३६७-३९७,
-कैसे करें ९ : ३५९-३६४,
९ : ५१७-५१९, १२ : ९७-१४०
१८ : १३५३-१३६१,
गहन- ९ : २१२-२१८,
गुरुकी- ९ : २२०-२२७,
नमन- ९ : २२१-२२९,
परा- १८ : ११११-१११७,
( महात्माओंकी ) भजन-भक्ति
९ : १५९-१९६, १० : ११९-१२९,
व्यभिचारी भक्ति १३ : ८०७-८२१
सहजभक्ति १८ : ११७३-११८४,
ज्ञानयुक्तभक्ति ९ : २३९-२६१,
ज्ञानी भक्ति ९ : १४४-२१४,
भारत-
-माहात्म्य १ : २८-४९
अमर- १ : २०१, ९ : ५८,
-जीव १६ : ४, १८ : ७२९, १८ : १३०९
भ्रांति-
-का स्वरूप २ : १३३.
-निरास १३ : ११३५-११३९,
१४ : ३०३-३०४.
-परिणाम ६ : ६८, ६ : ७२-७९,
९ : ६०,
मद-
-तारुण्यका १३ : ७५५-७६०,
-धनका १६ : २२७,
मन-
-का निग्रह १२ : ५०१-५०९,
-स्वरूप ६ : ४११-४१७,
१३ : १०६-११५
-की दौड-परमात्माकी ओर ८ : ८२-८३,
१२ : ९७-१२०.
-की दौड विषयोंकी ओर
१५ : ३५५-३६०,
-प्रसाद १७ : २२५-२३५,
-संयम का उपाय ६ : १८४,
६ : ३८०-३८९, ६ : ४१९-४२०,
८ : १११-११३, १२ १०१७-१०१८,
माया-
-का परिणाम ७ : ६०-६७,
-का वर्णन ७ : ६८-८२, १४ : ८८-८९,
१४ : ९१-११३, १५ : ८०-८९,
-का स्वरूप १४ : ६८-११५,
-का सामर्थ्य १ : १०३,
तरना कठिन ७ : ८३-९७.
तरनेका उपाय ७ : ९७-१०२
मार्दव-१६ : १६८-१७४.
मूढ-३ : १७८-१७९, ३ : १९८, ४ : २५,
९ : १४३-१४५.
मृत्युलोक ९ : ४९०-५१५.
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विषय-विश्लेषण