ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)
Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१५ : १८४-२०५.
—की वृद्धि—
तम १४ : २४४-२५४
रज १४ : २२७-२३६
सत्व १४ : २०५-२१३,
—की व्याप्ति १७ : ५६-६०
१८ : ८१४-८१७
—से मुक्त होनेका मार्ग १४ : ३०१-३०८
१४ : ३७१-४००
चित्त—
आत्म-रत ३ : १८३, ५ : ३४-३६,
५ : १४८
ईश्वर-रत १८ : १२६७-१२६९
—शुद्धि १८ : १५५-१६०.
चिंता—
ईश्वरविषयक—६ : ४४७.
लौकिक १६ : ३३०-३३३.
जगत्—
—का स्वरूप १८ : २३८-२३९
—की उत्पत्ति १४ : ६६., १० : ९७-११६
जन्म-मृत्यु—
—अनिवार्य है २ : १५९-१६०, १८ : १०१
—का अनुदर्शन १३ : ५३६-५५४,
१६ : १७५-१८६
—का स्वरूप १८ : १२८०.
जरा—
अनुदर्शन १३ : ५५५-५८६
—का वर्णन १३ : ७५६-७६०.
जीव—
अविद्याग्रस्त—७ : ६०-६७.
कर्ता—१८ : ४९०-५०५.
—का पुनर्जन्म १५ : ३६१-३६७.
—का स्वरूप १८ : ३२१-३२६,
अलिप्तता १४ : ३४८-३५०.
—स्त्रीके विषयमें १५ : ३६८-३७२.
परमात्मासे ऐक्य प्राप्त—६ : ७१-८४,
६ : ४८०, १२ : १५३.
प्रकृतितत्त्व—१५ : ३५२-३६०.
तत्—
—नामका उपयोग १७ : ३७०-३७३.
तत्त्वज्ञानार्थदर्शन—१३ : ६२३-६३१.
तप—
—का स्वरूप ४ : ६५, १६ : १०५-११२,
१८ : ८३७.
—तामसिक १७ : २५४-२६२,
—मानसिक १७ : २२७-२३७
राजसिक १७ : २४२-२५७
वाचिक—१७ : २१६-२३३
शारीरिक—१७ : २०२-२१४.
सात्विक— १७ : २४०-२४१,
तेज १६ : १८६-१९०, १८ : ८५८-८६०
त्याग—
—का स्वरूप १६ : १३१-१३५,
१८ : ९२
तामसिक— १८ : १७८-१८३,
राजसिक— १८ : १८४-१९८
सात्विक— १८ : १९९-२१६,
दंभ— ३ : २५०, १३ : ६५८-६६०,
१६ : २१७-२२३
—त्याग ( अदंभ ) १३ : २०२-२१५,
दम— १६ : ८९-९३, १८ : ८३५-८३६,
दया— १६ : १५४-१६२,
दर्प— १६ : २२४-२२९, १६ : ३९३-३९४,
१८ : १०५५-१०५७,
दान—
—दैवीगुण १६ : ८५-८८,
—क्षत्रियोंमें १८ : ८६९-८७०,
तामसिक १७ : २९४-३०७,
—राजसिक १७ : २८४-२९३
—सात्विक १७ : २६६-२८३,
दुःख—
—का अनुदर्शन १३ : ५९०-५९१
—का कारण २ : १११-११९,
ज्ञानेश्वरी ४२