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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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प्रस्तावना
तिपिटक (=त्रिपिटक ) अधिकांशतः भगवान् बुद्धके उपदेशोंका
संग्रह है। त्रिपिटकका अर्थ है, तीन पिटारी। यह तीन पिटक हैं—
सुत्त (=सूत्र ), विनय और अभिधम्म (=अभिधर्म ) ।
१. सुत्तपिटक निम्नलिखित पाँच निकायोंमें विभक्त है—
१. दीघ-निकाय ३४ सुत्त (=सूक्त या सूत्र )
२ मज्झिम-नि. १५२ सुत्त
३. संयुत्त-नि ५६ संयुत्त
४ अंगुत्तर-नि. ११ निपात
५. खुद्दक-नि. १५ ग्रंथ
खुद्दक-निकायके १५ ग्रंथ यह हैं—
( १ ) खुद्दकपाठ ( ९ ) थेरी-गाथा
( २ ) धम्मपद ( १० ) जातक ( ५५० कथायें )
( ३ ) उदान ( ११ ) निद्देस ( चुल्ल-; महा- )
( ४ ) इतिवृत्तक ( १२ ) पटिसंम्भिदामग्ग
( ५ ) सुत्तनिपात ( १३ ) अपदान
( ६ ) विमान-वत्थु ( १४ ) बुद्धवंस
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