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सर्वकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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पृष्ठ 6

( १० )
व्यवस्थापकीय वक्तव्य
रक्त-मांस भाषा-विचार सभी दृष्टियोंसे हिन्दीभाषाभाषी भग-
वान् बुद्धके उत्तराधिकारी हैं। इन्हीं के पूर्वजोंने उनके अमृतमय
उपदेशोंको सर्व प्रथम अपनाया । इन्होंने ही दुनियामें
भारतकी धार्मिक और सांस्कृतिक विजयदुन्दुभी बजाई । पूर्वजोंकी
इस अद्भुत और अमर कीर्त्तिका स्मरण करते, किसका शिर ऊँचा
न होगा । लेकिन, यह कितने शोककी बात है, कि मातृ-भाषा
हिन्दीमें भगवान् के दिव्य संदेश नहींके बराबर हैं । इसी कमी
को दूर करनेके लिये हिन्दीमें महाबोधि-ग्रंथ-माला निकालनेका उप-
क्रम हुआ है । धम्मपद मालाका प्रथम पुष्प है । आगे निकलनेवाली
पुस्तकोंके सस्तेपन और सुंदर छपाईका अनुमान इसी पुस्तकसे आप
कर सकते हैं । मालाकी दूसरी पुस्तक होगी—मज्झिमनिकाय ।
हम आशा करते हैं, कि हिन्दीप्रेमी सज्जन इस काममें हमारा
हाथ बँटायेंगे और आठ आना भेज कर मालाके स्थायी ग्राहक
बन जायेंगे ।
( ब्रह्मचारी ) देवप्रिय
प्रधानमंत्री, महाबोधि सभा,
ऋषिपत्तन, सारनाथ ( बनारस )