धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२१९ ] पापवग्गो [ ५७
अनुवाद--"वह मेरे पास नहीं आयेगा"-ऐसा ( सोच ) पुण्यकी
अवहेलना न करे । पानी की० । धीर थोडा थोडा संचय
करते पुण्यको भर लेता है ।
जेतवन महाधन ( वणिक् )
१२३-वाणिजो 'व भयं मग्गं अप्पसत्थो महद्धनो ।
विसं जीवितुकामो'व पापानि परिवज्जये ॥८॥
( वणिगिव भयं मार्गं अल्पसार्थो महाधनः ।
विषं जीवितुकाम इव पापानि परिवर्जयेत् ॥ ८ ॥ )
अनुवाद-थोडे काफिले और महाधनवाला बनजारा जैसे भययुक्त
रास्तेको छोड देता है, ( अथवा ) जीनेकी इच्छावाला
पुरुष जैसे विषको, ( छोड देता है ); वैसे ही ( पुरुष ) पापों-
को छोड दे ।
वेणुवन कुक्कुटमित्त
१२४-पाणिम्हि चे वणो नास्स हरेय्य पाणिना विसं ।
नाब्बणं विसमन्वेति नत्थि पापं अकुब्बतो ॥९॥
( पाणौ चेद् व्रणो न स्याद् हरेत् पाणिना विषम् ।
ना ऽव्रणं विषमन्वेति, नास्ति पापं अकुर्वतः ॥ ९ ॥
अनुवाद-यदि हाथमें घाव न हो, तो हाथसे विषको ले ले (क्योंकि)
घाव (=व्रण )-रहित ( शरीरमें ) विष नहीं लगता; ( इसी
प्रकार ) न करनेवालेको पाप नहीं लगता ।