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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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पृष्ठ 60

८१८ ] सहस्सवग्गो [ ४९
( नैव देवो न गन्धर्वो न मारः सह ब्रह्मणा ।
जितं अपजितं कुर्यात् तथारूपस्य जन्तोः ॥ ६ ॥
अनुवाद—इन अन्य प्रजाओंके जीतनेकी अपेक्षा अपनेको जीतना श्रेष्ठ
है । अपनेको दमन करनेवाला, नित्य अपनेको संयम
करनेवाला जो पुरुष है। इस प्रकारके प्राणीके जीतेको,
न देवता, न गन्धर्व, न ब्रह्मा सहित मार, बेजीता कर
सकते हैं ।
वेणुवन सारिपुत्तके मामा
१०६—मासे मासे सहस्सेन यो यजेथ सतं समं ।
एकञ्च भावितत्तानं मुहुत्तमपि पूजये ।
सा येव पूजना सेय्यो 'यं चे वस्ससतं हुतं ॥७॥
( मासे मासे सहस्रेण यो यजेत शतं समान् ।
एकं च भावितात्मानं मुहूर्तमपि पूजयेत् ।
सैव पूजना श्रेयसी यच्चेव् वर्षशतं हुतम् ॥ ७ ॥ )
अनुवाद—सहस्र(-दक्षिणा यज्ञ) से जो महीने महीने सौ वर्ष
तक यजन करे, और यदि परिशुद्ध मनवाले एक (पुरुष)
को एक मुहुर्त ही पूजे ; तो सौ वर्षके हवनसे यह पूजा
ही श्रेष्ठ है ।
वेणुवन सारिपुत्तका भाजा
१०७—यो च वस्ससतं जन्तु अग्गिं परिचरे वने ।
एकं च भावितत्तानं मुहुत्तमपि पूजये ।
सा येव पूजना सेय्यो यं चे वस्ससतं हुतं ॥८॥
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