धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
DevanagariHindipublished213 पृष्ठ
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८—सहस्सवग्गो
वेणुवन तम्बदाठिक (चोरघातक)
१००—सहस्समपि चे वाचा अनत्थपदसंहिता ।
एकं अत्थपदं सेय्यो यं सुत्वा उपसम्मति ॥ १॥
(सहस्रमपि चेद् वाचः अनर्थपदसंहिताः ।
एकमर्थपदं श्रेयो यच्छ्रुत्वोपशाम्यति ॥ १ ॥)
अनुवाद—व्यर्थके पदोंसे युक्त सहस्रों वाक्योंसे भी (वह) सार्थक
एक पद श्रेष्ठ है, जिसे सुनकर शान्ति होती है।
जेतवन दारुचीरिय (थेर)
१०१—सहस्समपि च गाथा अनत्थपदसंहिता ।
एकं गाथापदं सेय्यो यं सुत्वा उपसम्मति ॥२॥
(सहस्रमपि चेद् गाथा अनर्थपदसंहिताः ।
एकं गाथापदं श्रेयो यच्छ्रुत्वोपशाम्यति ॥ २ ॥)
अनुवाद—व्यर्थके पदोंसे युक्त हज़ार गाथाओंसे भी एक गाथापद
श्रेष्ठ है, जिसे सुनकर० ।
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