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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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६।११ ] पण्डितवग्गो [ ३९
( नात्महेतोः न परस्य हेतोः
न पुत्रमिच्छेत् न धनं न राष्ट्रम् ।
नेच्छेद् अधर्मेण समृद्धिमात्मनः
स शीलवान् प्रज्ञावान् धार्मिकः स्यात् ॥९॥ )
अनुवाद—जो अपने लिए या दूसरेके लिये पुत्र, धन, और राज्य
नहीं चाहते, न अधर्मसे अपनी उन्नति चाहते हैं; वही
सदाचारी ( शीलवान् ) प्रज्ञावान और धार्मिक हैं ।
जेतवन धर्मश्रवण
८५—अप्पका ते मनुस्सेसु ये जना पारगामिनो ।
अथायं इतरा पजा तीरमेवानुधावति ॥१०॥
( अल्पकास्ते मनुष्येषु ये जनाः पारगामिनः ।
अथेमा इतराः प्रजाः तीरमेवानुधावति ॥१०॥ )
८६—ये च खो सम्मदक्खाते धम्मे धम्मानुवत्तिनो ।
ते जना पारमेस्सन्ति मच्चुधेय्यं सुदुत्तरं ॥११॥
( ये च खलु सम्यगाख्याते धर्मे धर्मानुवर्तिनः ।
ते जनाः पारमेष्यन्ति मृत्युधेयं सुदुस्तरम् ॥११॥ )
अनुवाद—मनुष्योंमें पार जानेवाले जन विरले ही हैं, यह दूसरे
लोग तो तीरे ही तीरे दौड़नेवाले हैं। जो सुव्याख्यात धर्म-
का अनुगमन करते हैं, वह मृत्युगृहीत अतिदुस्तर (संसार-
सागर) को पार करेंगे।