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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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पृष्ठ 126

१९—धम्मट्ठवग्गो
जेतवन विनिच्छयमहामच्च (=जज )
२५६-न तेन होति धम्मट्ठो येनत्थं सहसा नये ।
यो च अत्थं अनत्थञ्च उभो निच्छेय्य पण्डितो ॥१॥
( न तेन भवति धर्मस्थो येनार्थं सहसा नयेत् ।
यश्चाऽर्थं अनर्थं च उभौ निश्चिनुयात् पंडितः ॥१॥ )
२५७-असाहसेन धम्मेन समेन नयती परे ।
धम्मस्स गुत्तो मेधावी धम्मट्ठो'ति पवुच्चति ॥२॥
(असाहसेन धर्मेण समेन नयते परान् ।
धर्मेण गुप्तो मेधावी धर्मस्थ इत्युच्यते ॥२॥ )
अनुवाद—सहसा जो अर्थ (=कामकी वस्तु )को करता है, वह धर्ममें
अवस्थित नहीं कहा जाता, पंडितको चाहिये कि वह अर्थ,
अनर्थ दोनों को विचार ( करके ) करे ।
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