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सर्वकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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पृष्ठ 109

९८ ] धम्मपदं [ १६।८
अनुवाद—प्रेमसे शोक उत्पन्न होता है, प्रेमसे भय उत्पन्न होता है,
प्रेमसे मुक्तको शोक नहीं, फिर भय कहाँसे ?
वैशाली (कूटागारशाला) लिच्छवि लोग
२१४-रतिया जायते सोको रतिया जायते भयं ।
रतिया विप्पमुत्तस्स नत्थि सोको कुतो भयं ॥६॥
(रत्या जायते शोको रत्या जायते भयम् ।
रत्या विप्रमुक्तस्य नाऽस्ति शोकः कुतो भयम् ॥६॥)
अनुवाद—रति(=राग) से शोक उत्पन्न होता है, रतिसे भय उत्पन्न
होता है० ।
जेतवन अनित्यगन्धकुमार
२१५-कामतो जायते सोको कामतो जायते भयं ।
कामतो विप्पमुत्तस्स नत्थि सोको कुतो भयं ॥७॥
(कामतो जायते शोकः कामतो जायते भयम् ।
कामतो विप्रमुक्तस्य नाऽस्ति शोकः कुतो भयम् ? ॥७॥)
अनुवाद—कामसे शोक उत्पन्न होता है० ।
जेतवन कोई ब्राह्मण
२१६-तणहाय जायते सोको तणहाय जायते भयं ।
तणहाय विप्पमुत्तस्स नत्थि सोको कुतो भयं ?॥८॥
(तृष्णाया जायते शोकः तृष्णाया जायते भयम् ।
तृष्णाया विप्रमुक्तस्य नाऽस्ति शोकः कुतो भयम् ? ॥८॥)