सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

पृष्ठ 104, कुल 213 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 104

१५।१० ] सुखवग्गो [ ९३
यह जान, यथार्थ निर्वाणको सबसे बड़ा सुख (कहा
जाता है)।
जेतवन ( पसेनदि कोसलराज )
२०४-आरोग्यपरमा लाभा सन्तुट्ठी परमं धनं ।
विस्सासपरमा ञाती निब्बाणं परमं सुखं ॥८॥
( आरोग्यं परमो लाभः, सन्तुष्टिः परमं धनम् ।
विश्वासः परमा ज्ञातिः, निर्वाणं परमं सुखम् ॥८॥ )
अनुवाद—निरोग होना परम लाभ है, सन्तोष परम धन है, विश्वास
सबसे बड़ा बन्धु है, निर्वाण परम (=सबसे बड़ा) सुख है।
वैशाली तिस्स (थेर)
२०५-पविवेकरसं पीत्वा रसं उपसमस्स च ।
निद्दरो होति निष्पापो धम्मपीतिरसं पिवं ॥६॥
( प्रविवेकरसं पीत्वा रसं उपशमस्य च ।
निर्दरो भवति निष्पापो धर्म प्रीतिरसं पिवन् ॥९॥ )
अनुवाद—एकान्त (चिन्तन)के रस, तथा उपशम (=शान्ति)के
रसको पीकर (पुरुष), निडर होता है, (और) धर्मका
प्रेमरस पानकर निष्पाप होता है।
बेल्लुवग्राम (वेणुग्राम, वैशालीके पास) सक्क (देवराज)
२०६-साधु दस्सनमरियानं सन्निवासो सदा सुखो ।
अदस्सनेन बालानं निच्चमेव सुखी सिया ॥१०॥