दायभाग (जीमूतवाहन - पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Dayabhaga of Jimutavahana with Hindi Commentary
जीमूतवाहन (टीकाकार: पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी) द्वारा
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शुभ सम्मति
प्राच्य प्रतीच्य विद्याविशारद श्री टीकम सिंह
तोमर एम. ए. अध्यक्ष—संस्कृत—हिन्दी
बलवन्त राजपूत कालेज, आगरा
अभी तक मुझे दाय भाग की कोई ऐसी टीका दृष्टिगोचर नहीं
हुई जो सर्वात्मना परीक्षार्थियों एवं मननार्थियों को उपयुक्त हो । दाय
भाग की व्याख्या की आवश्यकता इसलिये और भी अधिक थी कि
यह भाग अत्यधिक कठिन है । मिताक्षरा के ज्ञान के बिना यह प्रकरण
लिखा नहीं जा सकता । मिताक्षरा के जानने के लिये—व्याकरण
मीमांसा एवं धर्म शास्त्र के ज्ञान की अपेक्षा है ।
सौभाग्य से इन विषयों के अतिरिक्त भी अन्य शास्त्रों के भी
मर्मज्ञ ब्रज के प्रसिद्ध विद्वान्, एवं संस्कृत के उद्भट कविवर श्री वासु-
देव कृष्ण तुर्वेदी अध्यक्ष संस्कृत विभाग, इन्स्टीट्यूट ग्राफ ओरियन्टल
फिलासफी वृन्दावन द्वारा इसकी व्याख्या लिखी गई हैं । जिससे दाय
भाग के पाठकों एवं छात्रों को अत्यधिक लाभ होगा ।
मैं आशा करता हूँ कि यह विश्व विद्यालयों में सम्बन्धित पत्रों
में शीघ्र ही स्थान प्राप्त करेगी ।
लेखक का श्रम सराहनीय है
टीकम सिंह तोमर